Healthcare – झारखंड में ओला-उबर जैसी एंबुलेंस सेवा की तैयारी
Healthcare – झारखंड सरकार राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक आधुनिक और लोगों की जरूरतों के अनुरूप बनाने की दिशा में नए कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आयोजित स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं, अस्पतालों की सुविधाओं और डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने पर विशेष चर्चा हुई। बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से जोड़कर अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए।

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को समय पर उपचार मिले और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच पहले से अधिक आसान और व्यवस्थित हो सके। इसी क्रम में एंबुलेंस सेवाओं में सुधार को प्राथमिकता दी गई है।
एंबुलेंस व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
राज्य में एंबुलेंस सेवाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं। कई क्षेत्रों में समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने से मरीजों और उनके परिजनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एंबुलेंस संचालन की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाए। इसके तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कंट्रोल रूम स्थापित करने की योजना पर काम करने को कहा गया है, जिससे वाहनों की स्थिति और उपलब्धता पर लगातार नजर रखी जा सके।
नई प्रणाली होगी ऐप आधारित
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि एक सप्ताह के भीतर ऐसी व्यवस्था का खाका तैयार किया जाए, जिसमें जरूरत पड़ने पर लोगों को एंबुलेंस उसी तरह उपलब्ध हो सके जैसे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से टैक्सी सेवाएं उपलब्ध होती हैं।
प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य आपात स्थिति में मरीजों तक तेजी से सहायता पहुंचाना है। सरकार चाहती है कि अस्पतालों से संबद्ध सभी एंबुलेंस हर समय संचालन की स्थिति में रहें और उनकी उपलब्धता की जानकारी डिजिटल माध्यम से प्राप्त की जा सके।
लापरवाही पर होगी कार्रवाई
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एंबुलेंस और अन्य आवश्यक सेवाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।
सरकार का मानना है कि जवाबदेही तय होने से सेवा गुणवत्ता में सुधार आएगा और आम लोगों का स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा भी मजबूत होगा।
नागरिकों का तैयार होगा डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड
स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से जोड़ने के प्रयासों के तहत राज्य के नागरिकों का डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल तैयार करने की योजना पर भी जोर दिया गया है। विशेष रूप से बच्चों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को व्यवस्थित रूप से संकलित करने पर ध्यान दिया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से बीमारी की पहचान, उपचार और स्वास्थ्य निगरानी की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकेगी। इससे भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं को लागू करने में भी सुविधा मिलेगी।
एबीएचए अभियान को मिलेगा विस्तार
बैठक में आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (एबीएचए) कार्ड से जुड़े अभियान को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने का निर्णय भी लिया गया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इस पहल को स्कूलों, कॉलेजों, आंगनबाड़ी केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाया जाए।
सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को डिजिटल स्वास्थ्य पहचान प्रणाली से जोड़ना है, ताकि उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सके।
अस्पतालों में बढ़ेंगी आधुनिक सुविधाएं
स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं के विस्तार पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अस्पतालों को चरणबद्ध तरीके से अधिक सुविधाजनक बनाने और मरीजों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही बर्न यूनिट, आपातकालीन वार्ड और ऑपरेशन थिएटर जैसी महत्वपूर्ण चिकित्सा इकाइयों के आधुनिकीकरण पर भी जोर दिया गया। अस्पताल परिसरों की स्वच्छता और रखरखाव को लेकर भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
तकनीक आधारित स्वास्थ्य व्यवस्था की ओर कदम
सरकार का मानना है कि तकनीक और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है। डिजिटल निगरानी, स्वास्थ्य रिकॉर्ड और आधुनिक एंबुलेंस नेटवर्क जैसी योजनाएं इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।
आने वाले समय में इन योजनाओं के लागू होने से मरीजों को अधिक तेज, पारदर्शी और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।