झारखण्ड

WaterCrisis – नेतरहाट की तलहटी में बसे गांव में गहराया पेयजल संकट

WaterCrisis – झारखंड के लातेहार जिले में स्थित नेतरहाट अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और पर्यटन आकर्षण के लिए जाना जाता है, लेकिन इसी क्षेत्र के एक गांव में इन दिनों पेयजल की गंभीर समस्या लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। नेतरहाट की तलहटी में बसे नैना गांव के ग्रामीण पिछले करीब 12 दिनों से पानी की कमी का सामना कर रहे हैं। गांव का एकमात्र सरकारी कुआं क्षतिग्रस्त होने के बाद यहां रहने वाले दर्जनों परिवारों की दैनिक जरूरतें प्रभावित हो गई हैं।

करीब 300 आबादी वाले इस आदिवासी बहुल गांव में पानी की उपलब्धता अचानक बाधित होने से लोगों का जीवन कठिन हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है और अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

दूर से पानी लाने को मजबूर ग्रामीण

गांव में जलस्रोत प्रभावित होने के बाद महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों पर सबसे अधिक असर पड़ा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, हर दिन सुबह तड़के उठकर उन्हें लगभग दो किलोमीटर दूर स्थित नदी से पानी लाना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में यह काम और भी मुश्किल हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि घरेलू उपयोग, पीने और अन्य जरूरी कामों के लिए पर्याप्त पानी जुटाना चुनौती बन चुका है। कई परिवारों को सीमित पानी में ही पूरे दिन का काम चलाना पड़ रहा है।

प्रशासन पर उदासीनता के आरोप

गांव के लोगों ने आरोप लगाया है कि समस्या की जानकारी संबंधित विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार दी जा चुकी है। इसके बावजूद अभी तक कोई ठोस राहत व्यवस्था शुरू नहीं की गई है।

ग्रामीणों के अनुसार, अधिकारी गांव का दौरा तो कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति सुधारने के लिए अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए हैं। लोगों का कहना है कि निरीक्षण और आश्वासन के अलावा उन्हें अब तक कोई वास्तविक सहायता नहीं मिली है।

ग्रामीणों ने बताई अपनी परेशानी

स्थानीय निवासियों ने बताया कि कई दिनों से जिम्मेदार अधिकारियों को लगातार समस्या से अवगत कराया जा रहा है। उनका कहना है कि हर बार समाधान का भरोसा दिया जाता है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।

गांव की महिलाओं का कहना है कि पानी की कमी का सीधा असर घरों के दैनिक कामकाज पर पड़ रहा है। बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों की दिनचर्या भी इससे प्रभावित हुई है। ग्रामीणों ने जल्द राहत उपलब्ध कराने की मांग की है।

विभाग ने दी अस्थायी समाधान की जानकारी

इस मामले पर संबंधित विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें गांव की स्थिति की जानकारी है। विभाग के अनुसार, पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर काम किया जा रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि अस्थायी समाधान के तौर पर बोरिंग की योजना तैयार की जा रही है और इसके लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभाग का कहना है कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए भी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

योजनाओं पर उठे सवाल

नैना गांव की स्थिति ने ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर क्षेत्र को पर्यटन के लिहाज से विकसित करने की योजनाएं चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर आसपास के गांवों में बुनियादी सुविधाओं की कमी महसूस की जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास योजनाओं के साथ-साथ मूलभूत जरूरतों पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि पेयजल जैसी आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।

फिलहाल गांव के लोग प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप और स्थायी समाधान की उम्मीद लगाए हुए हैं ताकि उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े।

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