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PinarayiVijayan – ईडी कार्रवाई के बाद बदला केरल की राजनीति का समीकरण

PinarayiVijayan – केरल की राजनीति में लंबे समय तक सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन इन दिनों प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को लेकर चर्चा में हैं। तिरुवनंतपुरम और कन्नूर स्थित उनके आवासों पर हुई तलाशी ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक जानकार इसे सिर्फ एक जांच कार्रवाई नहीं, बल्कि केरल की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों का संकेत मान रहे हैं। वर्षों तक मजबूत संगठनात्मक पकड़ रखने वाले विजयन अब ऐसे दौर का सामना कर रहे हैं, जहां उनकी राजनीतिक स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं दिख रही।

सीपीआईएम नेतृत्व पर पहली बार बड़ा दबाव

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पहला अवसर है जब सीपीआईएम के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े किसी वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार से संबंधित वित्तीय मामलों में केंद्रीय एजेंसी की इतनी बड़ी कार्रवाई सामने आई है। वाम राजनीति में संगठनात्मक अनुशासन और साफ-सुथरी छवि को हमेशा प्रमुख आधार माना जाता रहा है। ऐसे में यह घटनाक्रम पार्टी के लिए राजनीतिक और नैतिक दोनों स्तर पर चुनौती बनता दिखाई दे रहा है।

कन्नूर से राज्य की सत्ता तक का सफर

पिनाराई विजयन का राजनीतिक सफर कन्नूर जिले से शुरू होकर केरल की सत्ता तक पहुंचा। 1998 के बाद से उन्होंने पार्टी संगठन और सरकार दोनों में अपनी मजबूत स्थिति बना ली थी। धीरे-धीरे पार्टी के भीतर उनके विरोधी कमजोर पड़ते गए और विजयन वामपंथी राजनीति का सबसे प्रभावशाली चेहरा बनकर उभरे। पार्टी के फैसलों और सरकार की रणनीति में उनकी भूमिका निर्णायक मानी जाती रही।

दूसरी बार सत्ता में वापसी ने बढ़ाई थी ताकत

साल 2021 के विधानसभा चुनाव में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की लगातार दूसरी जीत को विजयन की बड़ी राजनीतिक सफलता माना गया था। केरल में दशकों से चली आ रही सत्ता परिवर्तन की परंपरा को तोड़ते हुए वाम मोर्चा दोबारा सरकार बनाने में सफल रहा। उस समय यह धारणा मजबूत हुई थी कि विजयन का राजनीतिक प्रभाव राज्य में लंबे समय तक बना रहेगा।

हालिया चुनावी झटके के बाद बदले हालात

हाल के विधानसभा चुनावों में सीपीआईएम को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, जिसके बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरण उभरने लगे। विपक्ष के नेता वीडी सतीशन के नेतृत्व में विपक्ष अधिक आक्रामक नजर आया और सत्ता संतुलन बदलता दिखाई दिया। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, प्रशासनिक ताकत कम होने के बाद विजयन की राजनीतिक स्थिति पहले की तुलना में कमजोर महसूस की जा रही है।

राज्य पुलिस और ईडी के बीच रहा था टकराव

विजयन के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियों के बीच कई बार तनाव देखने को मिला था। गोल्ड स्मगलिंग मामले के दौरान केरल पुलिस और ईडी के बीच विवाद खुलकर सामने आया था। उस समय विपक्ष ने आरोप लगाए थे कि राज्य सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों के कामकाज में हस्तक्षेप कर रही है। यह मुद्दा लंबे समय तक राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रहा।

जांच के बीच राजनीतिक समर्थन जुटाने की कोशिश

सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में जांच तेज होने के बाद सीपीआईएम अब खुलकर विजयन के समर्थन में सामने आ रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह कार्रवाई राजनीतिक उद्देश्य से की जा रही है। कई स्थानों पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन भी किए हैं। वहीं विपक्ष का कहना है कि जांच एजेंसियों को अपना काम स्वतंत्र रूप से करने दिया जाना चाहिए।

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