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SupremeCourt – यूएई अदालत के आदेश वाले मामले पर जुलाई में होगी सुनवाई

SupremeCourt – सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को संकेत दिया कि हैदराबाद के उद्योगपति निम्मगड्डा प्रसाद से जुड़े बहुचर्चित वित्तीय विवाद की सुनवाई जुलाई में की जाएगी। मामला संयुक्त अरब अमीरात की अदालत के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें प्रसाद को बड़ी रकम लौटाने का निर्देश दिया गया था। दोनों पक्षों के बीच समझौते की कोशिशें विफल रहने के बाद अब शीर्ष अदालत सीधे इस मामले की सुनवाई करेगी।

यह विवाद विदेशी निवेश संस्था रास अल खैमाह इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी और निम्मगड्डा प्रसाद के बीच चल रहा है। अदालत में बताया गया कि पहले मध्यस्थता के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश की गई थी, लेकिन सहमति नहीं बन सकी।

पूर्व मुख्य न्यायाधीश की निगरानी में चली थी बातचीत

सूत्रों के अनुसार समझौते की प्रक्रिया भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित की देखरेख में चल रही थी। दोनों पक्षों के बीच कई दौर की चर्चा हुई, लेकिन अंतिम नतीजा नहीं निकल पाया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि अब मामले की नियमित सुनवाई की जाएगी।

विदेशी निवेश संस्था का दावा है कि यूएई की अदालत ने उसके पक्ष में फैसला सुनाते हुए निम्मगड्डा प्रसाद को करीब 543 करोड़ रुपये लौटाने का आदेश दिया था। संस्था का कहना है कि ब्याज जोड़ने के बाद यह राशि लगभग 643 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।

वानपिक परियोजना से जुड़ा है पूरा विवाद

यह मामला वर्ष 2008 की वानपिक परियोजना से संबंधित बताया जा रहा है। उस समय आंध्र प्रदेश में बंदरगाह और हवाई अड्डा विकसित करने की योजना बनाई गई थी। परियोजना में विदेशी निवेश भी शामिल था, लेकिन बाद में यह योजना अपेक्षित रूप से आगे नहीं बढ़ सकी।

इसी परियोजना में लगाए गए निवेश और उसके उपयोग को लेकर विवाद शुरू हुआ। विदेशी संस्था ने आरोप लगाया कि परियोजना के लिए जारी की गई राशि का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किया गया।

धन के दुरुपयोग के लगाए गए आरोप

रास अल खैमाह इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी ने अदालत में दावा किया कि परियोजना के लिए दिए गए लगभग 12 करोड़ अमेरिकी डॉलर का कथित तौर पर गलत उपयोग किया गया। संस्था ने आरोप लगाया कि निम्मगड्डा प्रसाद और उसके पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी खातेर मसाद ने मिलकर वित्तीय अनियमितताएं कीं।

दूसरी ओर प्रसाद की तरफ से अदालत को बताया गया कि उन्होंने पहले ही सुरक्षा राशि के तौर पर 125 करोड़ रुपये जमा करा दिए हैं। इसके अलावा तेलंगाना स्थित 37 एकड़ जमीन के मूल दस्तावेज भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं।

जुलाई में हो सकती है नियमित सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह में प्रतिदिन की जा सकती है। फिलहाल अदालत किसी नई अंतरिम याचिका पर विचार नहीं करेगी। अदालत ने पहले यह भी स्पष्ट किया था कि प्रसाद अपनी कंपनियों के सामान्य संचालन और कर्मचारियों के वेतन जैसे आवश्यक खर्चों के लिए धन का उपयोग कर सकते हैं।

हालांकि कोर्ट की अनुमति के बिना किसी भी अचल संपत्ति की बिक्री या हस्तांतरण पर रोक जारी रहेगी।

सुरक्षा राशि को लेकर पहले भी हुई थी चर्चा

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने प्रसाद से लगभग 600 करोड़ रुपये की सुरक्षा उपलब्ध कराने को कहा था। इसके जवाब में उन्होंने कुछ शेयर, संपत्तियां और 37 एकड़ जमीन को सुरक्षा के रूप में अदालत के समक्ष रखा था।

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