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AlcoholPolicy – छोटे पाउच और टेट्रा पैक में शराब बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

AlcoholPolicy – देश में शराब की बिक्री के तौर-तरीकों को लेकर दायर एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार सहित कई संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। अदालत में दाखिल याचिका में मांग की गई है कि टेट्रा पैक, छोटे पाउच और सैशे जैसी पैकेजिंग में शराब की बिक्री पर रोक लगाई जाए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की पैकेजिंग शराब को आम लोगों, खासकर युवाओं और निम्न आय वर्ग तक आसानी से पहुंचा रही है।

पैकेजिंग को लेकर उठे स्वास्थ्य और सामाजिक सवाल

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में दावा किया गया है कि छोटे और सस्ते पैक में शराब उपलब्ध होने से इसकी खपत तेजी से बढ़ रही है। याचिका के अनुसार, इस तरह की बिक्री न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है, बल्कि इससे सामाजिक समस्याओं में भी इजाफा हो रहा है। अदालत को बताया गया कि छोटे पाउच और टेट्रा पैक के जरिए शराब ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बेहद आसानी से उपलब्ध हो जाती है।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि इस प्रकार की पैकेजिंग से शराब का उपयोग सामान्य उपभोक्ता वस्तु की तरह दिखने लगा है, जिससे युवाओं और पहली बार शराब का सेवन करने वालों पर गलत प्रभाव पड़ सकता है। इसी आधार पर अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।

केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से मांगा जवाब

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के अलावा संबंधित राज्यों और अन्य पक्षों को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने फिलहाल किसी प्रकार का अंतरिम आदेश नहीं दिया है, लेकिन मामले को गंभीर मानते हुए विस्तृत प्रतिक्रिया तलब की है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत इस मामले में सख्त रुख अपनाती है, तो शराब उद्योग की पैकेजिंग और बिक्री व्यवस्था में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। कई राज्यों में पहले से शराब की बिक्री और विज्ञापन को लेकर अलग-अलग नियम लागू हैं, ऐसे में यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस को जन्म दे सकता है।

शराब की उपलब्धता पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल

देश में शराब की आसान उपलब्धता को लेकर पहले भी कई सामाजिक संगठनों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि कम कीमत वाले छोटे पैक युवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को अधिक प्रभावित करते हैं। कुछ राज्यों में इस तरह की पैकेजिंग को सीमित करने की मांग समय-समय पर उठती रही है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर इस पर कोई एक समान नीति लागू नहीं हो सकी है।

अब सुप्रीम कोर्ट में चल रही इस सुनवाई पर स्वास्थ्य क्षेत्र, सामाजिक संगठनों और शराब उद्योग की नजर बनी हुई है। आने वाले समय में अदालत की टिप्पणी और सरकार का पक्ष इस मुद्दे की दिशा तय कर सकता है।

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