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TamilNaduElection – बहुमत नहीं, टीवीके बनी सबसे बड़ी पार्टी, सियासी हलचल तेज

TamilNaduElection – तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों ने इस बार राज्य की राजनीति को नई दिशा दे दी है। किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने से सत्ता गठन को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 234 में से 108 सीटें जीत ली हैं और सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। दूसरी ओर, सत्ताधारी डीएमके 59 सीटों तक सिमट गई, जबकि एआईएडीएमके को 47 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। इन परिणामों ने लंबे समय से चली आ रही पारंपरिक राजनीतिक धुरी को झटका दिया है।

सरकार गठन को लेकर बढ़ी राजनीतिक बातचीत

चुनाव नतीजों के तुरंत बाद सरकार बनाने की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई है। किसी भी दल के पास बहुमत का आंकड़ा न होने के कारण अब सहयोगी दलों की भूमिका अहम हो गई है। राजनीतिक दलों के बीच बातचीत का दौर जारी है और अलग-अलग समीकरणों पर विचार किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में यह साफ हो सकता है कि राज्य में किसके नेतृत्व में सरकार बनेगी।

सीपीआई एम का रुख, अंतिम निर्णय बाकी

सीपीआई एम ने अपने रुख को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं की है। पार्टी के राज्य सचिव पी. शनमुगम ने संकेत दिया है कि उनका झुकाव डीएमके गठबंधन की ओर है, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि विजय की पार्टी का रुख सामने आने के बाद ही पार्टी अपना निर्णय घोषित करेगी। उनके बयान से यह साफ है कि समर्थन का फैसला राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया जाएगा।

वीसीके ने भी बातचीत के बाद निर्णय की बात कही

विदूतलाई चिरुथाइगल काची (वीसीके) ने भी समर्थन को लेकर जल्दबाजी नहीं दिखाई है। पार्टी प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने कहा कि सभी सहयोगी दलों के साथ विचार-विमर्श के बाद ही कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि वीसीके, सीपीआई और सीपीआई एम के नेता डीएमके प्रमुख एम. के. स्टालिन से मुलाकात करेंगे। इस बैठक के बाद ही समर्थन को लेकर आधिकारिक घोषणा की जाएगी।

चुनाव में बड़े नेताओं को मिली हार

इस चुनाव में कई बड़े राजनीतिक चेहरों को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा है। टीवीके के उम्मीदवारों ने कई स्थापित नेताओं को पीछे छोड़ दिया। विजय ने खुद तिरुचिरापल्ली पूर्व और पेरम्बूर सीटों से जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की। वहीं, टीवीके के एमएस बाबू ने कोलाथुर सीट से मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन को 8,795 वोटों के अंतर से हराया, जो इस चुनाव का एक बड़ा उलटफेर माना जा रहा है।

वरिष्ठ नेताओं की पराजय ने बदला समीकरण

डीएमके के वरिष्ठ नेता दुरईमुरुगन को कटपडी सीट पर हार का सामना करना पड़ा। इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन और भाजपा की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तमिलिसाई सौंदराजन भी चुनाव में जीत हासिल नहीं कर सके। इन नतीजों ने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं और भविष्य की राजनीति पर इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है।

एक वोट से तय हुआ मुकाबला

इस चुनाव का सबसे चर्चित मुकाबला वह रहा, जहां जीत और हार के बीच सिर्फ एक वोट का अंतर रहा। डीएमके मंत्री के.आर. पेरियाकरुप्पन को टीवीके के सीनिवासा सेतुपति ने बेहद करीबी मुकाबले में मात दी। सेतुपति को 83,365 वोट मिले, जबकि पेरियाकरुप्पन 83,364 वोट पर ही रुक गए। इस नतीजे ने यह दिखाया कि हर वोट कितना महत्वपूर्ण होता है और चुनावी मुकाबले कितने कांटे के हो सकते हैं।

नई राजनीतिक दिशा की ओर बढ़ता तमिलनाडु

इस बार के चुनाव परिणामों ने यह संकेत दिया है कि राज्य की राजनीति अब पारंपरिक ढांचे से बाहर निकल रही है। टीवीके के उभार ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं और गठबंधन की राजनीति को नई अहमियत दी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कौन-सा दल किसके साथ मिलकर सरकार बनाता है और राज्य की दिशा किस ओर जाती है।

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