ElectionStrategy – बिना टीम के चुनावी तैयारी में जुटी उत्तराखंड कांग्रेस
ElectionStrategy – उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस संगठनात्मक स्तर पर चुनौतियों से जूझती नजर आ रही है। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल पार्टी के अभियान को आगे बढ़ाने में सक्रिय हैं, लेकिन उनके पास पूर्ण प्रदेश कार्यकारिणी का अभाव साफ दिखाई दे रहा है।

करीब छह महीने से प्रदेश कांग्रेस बिना नई टीम के काम कर रही है, जिससे चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने में कठिनाई सामने आ रही है।
संगठनात्मक ढांचे की कमी बनी चुनौती
राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन पार्टी के अंदर अभी भी पूर्ण संगठनात्मक ढांचा तैयार नहीं हो पाया है। प्रदेश कार्यकारिणी के गठन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जिसके कारण विभिन्न स्तरों पर सक्रियता सीमित दिख रही है।
हालांकि जिला और ब्लॉक स्तर पर कुछ नियुक्तियां हो चुकी हैं, लेकिन राज्य स्तर की टीम के अभाव में समन्वय प्रभावित हो रहा है।
पहले भी रही ऐसी ही स्थिति
यह पहली बार नहीं है जब प्रदेश कांग्रेस इस तरह की स्थिति का सामना कर रही है। इससे पहले पूर्व अध्यक्ष करन माहरा के कार्यकाल में भी नई टीम के गठन में देरी हुई थी। उस समय भी हाईकमान से मंजूरी मिलने में समय लगा था, जिसके चलते संगठनात्मक गति प्रभावित हुई थी।
अब दोबारा अध्यक्ष बने गणेश गोदियाल के सामने भी लगभग वैसी ही परिस्थिति बनी हुई है।
हाईकमान के निर्णय का इंतजार
प्रदेश कांग्रेस की ओर से नई कार्यकारिणी के लिए प्रस्तावित नामों की सूची केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जा चुकी है। अंतिम निर्णय अब हाईकमान के स्तर पर लिया जाना है।
जब तक नई टीम का औपचारिक गठन नहीं होता, तब तक पूर्व कार्यकारिणी ही जिम्मेदारियां संभाल रही है।
चुनावी तैयारियों पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी वर्ष से पहले संगठन का मजबूत होना जरूरी होता है। जमीनी स्तर पर रणनीति लागू करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए स्पष्ट नेतृत्व संरचना अहम भूमिका निभाती है।
ऐसे में टीम के गठन में देरी का असर पार्टी की तैयारियों पर पड़ सकता है।
नेतृत्व का भरोसा बरकरार
प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भरोसा जताया है कि जल्द ही नई कार्यकारिणी की घोषणा की जाएगी। उन्होंने बताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को चुनाव अभियान और प्रबंधन की जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं और सभी मिलकर 2027 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए काम कर रहे हैं।
उनके अनुसार, संगठन को मजबूत करने की दिशा में प्रक्रिया जारी है और आने वाले समय में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
आगे की राह पर नजर
राज्य की राजनीति में कांग्रेस की सक्रियता बनी हुई है, लेकिन संगठनात्मक ढांचे को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब सभी की नजर हाईकमान के फैसले पर टिकी है।
नई टीम के गठन के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पार्टी चुनावी मैदान में किस तरह की रणनीति के साथ उतरती है।