ElectionSecurity – असम में स्ट्रॉन्गरूम सुरक्षा पर विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल
ElectionSecurity – असम विधानसभा में विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया ने चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं। उन्होंने चुनाव आयोग को लिखे एक पत्र में आरोप लगाया है कि कई विधानसभा क्षेत्रों के स्ट्रॉन्गरूम में रखी चुनाव सामग्री की सुरक्षा में बड़ी लापरवाही बरती गई है। सैकिया ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुराग गोयल को भेजे अपने पत्र में कहा है कि उन्होंने इन दावों के समर्थन में फोटो और वीडियो जैसे साक्ष्य भी उपलब्ध कराए हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं।

निरीक्षण के दौरान सामने आई खामियां
सैकिया ने बताया कि उन्होंने हाल ही में शिवसागर स्थित एक सरकारी विद्यालय में बनाए गए सामग्री भंडारण कक्षों का निरीक्षण किया। उनके अनुसार, नाजिरा समेत कई क्षेत्रों की चुनाव सामग्री जिन कमरों में रखी गई थी, वे निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतर रहे थे। उन्होंने कहा कि कुछ कमरों के दरवाजे केवल साधारण कुंडी से बंद थे, जबकि एक-दो दरवाजों पर लगे ताले भी ठीक से सील नहीं किए गए थे। ऐसी स्थिति में इन कक्षों तक पहुंचना मुश्किल नहीं था।
डबल लॉक सिस्टम का पालन नहीं होने का आरोप
विपक्ष के नेता ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग द्वारा अनिवार्य किए गए डबल लॉक सिस्टम का पालन नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि एक कमरे का दरवाजा हल्के दबाव से ही खुल सकता था, जिसमें महत्वपूर्ण चुनाव दस्तावेज रखे गए थे। इस तरह की लापरवाही से चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
सुरक्षा बलों की भूमिका पर भी उठे सवाल
सैकिया ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि वहां तैनात सीआरपीएफ के जवानों ने यह संकेत दिया कि उनकी जिम्मेदारी विशेष रूप से इन स्ट्रॉन्गरूम की निगरानी करना नहीं है। उन्होंने इसे सुरक्षा तंत्र की एक बड़ी कमी बताया और कहा कि जब संवेदनशील सामग्री की सुरक्षा स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं होगी, तो जोखिम बढ़ना स्वाभाविक है।
चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
अपने पत्र में सैकिया ने चुनाव आयोग से इस पूरे मामले की तत्काल जांच कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए तय दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, जैसे स्थायी संतरी पोस्ट की तैनाती और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग उठाई है।
मतदान और आगे की प्रक्रिया
गौरतलब है कि असम में नौ अप्रैल को मतदान संपन्न हुआ था, जिसमें बड़ी संख्या में मतदाताओं ने हिस्सा लिया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, लगभग 85.96 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। अब सभी की नजरें चार मई को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं, जहां चुनावी नतीजे सामने आएंगे।