Mayawati – बेरोजगारी और महंगाई पर मायावती ने सरकारों को घेरा…
Mayawati ने देश में बेरोजगारी, महंगाई, अशिक्षा और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों पर सवाल उठाए हैं। बसपा अध्यक्ष ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि सरकारों को गरीबों, श्रमिकों, युवाओं और महिलाओं से जुड़े रोजगार तथा आर्थिक मुद्दों पर अधिक गंभीरता से काम करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि बसपा सरकार के कार्यकाल में पुलिस और पंचायती राज विभाग में करीब ढाई लाख सरकारी पद सृजित किए गए थे। मायावती ने मौजूदा समय में सरकारी विभागों के खाली पदों पर समयबद्ध और पारदर्शी भर्ती शुरू करने की मांग भी रखी।

सरकारी नौकरियों पर मायावती का जोर
बसपा प्रमुख ने कहा कि सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली हैं और इन पर भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने प्रश्नपत्र लीक और भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए पारदर्शी व्यवस्था की आवश्यकता बताई।
मायावती के अनुसार, रोजगार का सीधा संबंध परिवारों की आर्थिक स्थिति से है। उन्होंने कहा कि यदि एक परिवार के किसी सदस्य को स्थायी सरकारी रोजगार मिलता है तो उसका लाभ पूरे परिवार तक पहुंचता है। उन्होंने एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के संवैधानिक अधिकारों तथा सामाजिक सुरक्षा का भी उल्लेख किया।
‘हर हाथ को काम’ की नीति की वकालत
मायावती ने सरकारों से आर्थिक नीतियों में जनकल्याण को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय संपत्तियों को निजी हाथों में देने के बजाय रोजगार के अवसर बढ़ाने और सरकारी संस्थानों में रिक्त पद भरने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
बसपा अध्यक्ष ने ‘हर हाथ को काम’ की नीति को व्यापक जनहित से जोड़ते हुए कहा कि रोजगार मिलने से परिवारों की आर्थिक परेशानियां कम हो सकती हैं। उन्होंने सरकारों से मुनाफे पर आधारित दृष्टिकोण के बजाय संविधान की मानवतावादी भावना के अनुरूप नीतियां बनाने की मांग की।
जंतर-मंतर आंदोलन का भी किया उल्लेख
मायावती ने जंतर-मंतर पर युवाओं के आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि बेरोजगारी और अन्य जनसमस्याओं को राजनीतिक प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने संसद के मौजूदा सत्र में इन मुद्दों को लेकर जारी गतिरोध समाप्त करने की अपील की।
उन्होंने अपने बयान में एक छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए दावा किया कि इससे रोजगार और शिक्षा से जुड़े विषय राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बने हैं। उन्होंने सरकार से युवाओं की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की बात कही।
भाजपा और आम आदमी पार्टी पर साधा निशाना
मायावती ने भाजपा और आम आदमी पार्टी को लेकर भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने दिल्ली के तुगलकाबाद में संत गुरु रविदास से जुड़े स्थल के 2019 में ध्वस्तीकरण का जिक्र किया और कहा कि उस घटना के विरोध में प्रदर्शन हुए थे।
उन्होंने दावा किया कि विरोध के दौरान लाठीचार्ज और गिरफ्तारियां हुईं तथा कई लोगों को जेल जाना पड़ा। मायावती ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से गुरु रविदास के अनुयायियों की भावनाएं प्रभावित हुईं। उनके मुताबिक, संबंधित स्थल की जमीन और पुनर्निर्माण का मुद्दा आज भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा है।
पंजाब की राजनीति को लेकर भी टिप्पणी
बसपा प्रमुख ने पंजाब में चुनावी राजनीति का जिक्र करते हुए भाजपा और आम आदमी पार्टी पर राजनीतिक लाभ के लिए संत रविदास के नाम का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसी राजनीति से सावधान रहना चाहिए।
मायावती ने धलेता गांव में गुरुघर की दीवार गिराए जाने के मामले का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, बसपा और स्थानीय संगत के विरोध के बाद आम आदमी पार्टी सरकार ने पुनर्निर्माण कराया। उन्होंने कहा कि धार्मिक और सामाजिक भावनाओं से जुड़े मामलों को राजनीतिक लाभ के बजाय संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए।
मायावती के बयान में रोजगार, सरकारी भर्ती, सामाजिक अधिकार और धार्मिक स्थलों से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से जनहित से जुड़े विषयों पर ठोस कदम उठाने की मांग की है।