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CCTVMonitoring – थानों में सीसीटीवी व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट ने दिए सख्त निर्देश

CCTVMonitoring – देशभर के थानों में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। इस मुद्दे पर सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्रीय गृह सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है, ताकि इस योजना के क्रियान्वयन की स्थिति पर स्पष्ट जानकारी मिल सके। अदालत ने यह कदम उस समय उठाया जब सामने आया कि कई स्थानों पर अभी भी सीसीटीवी व्यवस्था अधूरी है।

सुनवाई के दौरान उठे सुरक्षा से जुड़े सवाल

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। इस दौरान एक मीडिया रिपोर्ट का जिक्र हुआ, जिसमें बताया गया था कि कुछ स्थानों पर विदेशी कंपनियों द्वारा लगाए गए सीसीटीवी कैमरों को हटाया जा रहा है। अदालत ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सुरक्षा कारणों से ऐसे उपकरण हटाए जा रहे हैं, तो इसकी स्पष्ट नीति सामने आनी चाहिए।

डेटा सुरक्षा को लेकर जताई गई चिंता

सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि कुछ कैमरों से जुड़ा डेटा देश के बाहर भेजे जाने की आशंका जताई गई है। इस पर अदालत ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के मामलों में पारदर्शिता और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित की जानी चाहिए। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में अभी तक कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं किया गया है।

राज्यों में व्यवस्था की प्रगति पर चर्चा

अदालत को यह भी बताया गया कि कई राज्यों ने अपने थानों में सीसीटीवी कैमरे स्थापित कर लिए हैं और अब एक केंद्रीकृत निगरानी प्रणाली विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। सुनवाई के दौरान केरल का उदाहरण दिया गया, जहां व्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर बताई गई। इस पर अदालत ने सवाल उठाया कि यदि एक राज्य बेहतर व्यवस्था कर सकता है, तो अन्य राज्य भी इसी मॉडल को क्यों नहीं अपनाते।

बैठकों में प्रतिनिधित्व पर जताई नाराजगी

पीठ ने इस बात पर असंतोष जताया कि इस महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित बैठकों में निचले स्तर के अधिकारी शामिल हो रहे हैं। अदालत ने कहा कि जब मामला सीधे तौर पर नागरिकों की सुरक्षा और पारदर्शिता से जुड़ा है, तो इसमें वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी जरूरी है। इसके बाद केंद्र की ओर से आश्वासन दिया गया कि आगे की बैठकों में उच्च स्तर के अधिकारी शामिल होंगे।

गृह सचिव को तलब कर मांगी गई जवाबदेही

अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले की निगरानी वह स्वयं कर रही है और इसीलिए केंद्रीय गृह सचिव की उपस्थिति आवश्यक है। अदालत का मानना है कि उच्च स्तर पर समन्वय के बिना इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू करना संभव नहीं होगा। अब अगली सुनवाई में गृह सचिव से सीधे इस विषय पर जानकारी ली जाएगी।

कार्यान्वयन को लेकर बढ़ी अपेक्षाएं

इस निर्देश के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि देशभर के थानों में सीसीटीवी व्यवस्था को लेकर स्पष्ट और ठोस कदम उठाए जाएंगे। अदालत ने संकेत दिया है कि यह केवल तकनीकी व्यवस्था नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और नागरिक अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।

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