WomenMarket – जानें क्यों वायरल हुआ इंफाल का अनोखा बाजार जहां कारोबार संभालती हैं सिर्फ महिलाएं…
WomenMarket – मणिपुर की राजधानी इंफाल अपने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए जानी जाती है, लेकिन यहां स्थित एक ऐसा बाजार भी है जिसने वर्षों से अपनी अलग पहचान बनाए रखी है। इस बाजार की सबसे खास बात यह है कि यहां व्यापार की कमान पूरी तरह महिलाओं के हाथों में है। सब्जियों और मसालों से लेकर कपड़ों, आभूषणों और हस्तशिल्प उत्पादों तक, हर दुकान पर महिला विक्रेता ही ग्राहकों से लेन-देन करती नजर आती हैं। यह परंपरा कोई नई नहीं, बल्कि सदियों पुरानी मानी जाती है।

‘मां का बाजार’ के नाम से प्रसिद्ध है यह जगह
इंफाल में स्थित इस ऐतिहासिक बाजार को इमा कीथल कहा जाता है, जिसका अर्थ है ‘मां का बाजार’। स्थानीय समाज में इसका विशेष महत्व है और इसे एशिया के सबसे बड़े महिला-प्रबंधित बाजारों में गिना जाता है। ऐतिहासिक दस्तावेजों और विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, इसकी जड़ें कई शताब्दियों पुरानी हैं। माना जाता है कि इसका विकास उस दौर में हुआ जब पुरुषों को लंबे समय तक सैन्य सेवा या अन्य सरकारी कार्यों के लिए बाहर भेजा जाता था और महिलाओं ने स्थानीय व्यापार की जिम्मेदारी संभाल ली थी।
पीढ़ियों से चली आ रही है व्यापार की परंपरा
आज भी इस बाजार में हजारों महिलाएं व्यापार कर रही हैं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार यहां 5,000 से अधिक महिला विक्रेता सक्रिय हैं। खास बात यह है कि कई दुकानों का संचालन एक ही परिवार की कई पीढ़ियों से होता आ रहा है। मां से बेटी तक दुकान और व्यापार की जिम्मेदारी सौंपने की परंपरा ने इस बाजार को सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी विशेष बना दिया है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था की मजबूत कड़ी
इमा कीथल केवल एक ऐतिहासिक स्थल या पर्यटन आकर्षण नहीं है, बल्कि यह मणिपुर की अर्थव्यवस्था का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यहां स्थानीय किसानों, मछुआरों और कारीगरों द्वारा तैयार उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचते हैं। कृषि उपज, मछली, हथकरघा वस्त्र और पारंपरिक हस्तशिल्प की बिक्री इस बाजार की प्रमुख पहचान है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी बाजारों के बीच आर्थिक जुड़ाव भी मजबूत होता है।
महिलाओं की सामाजिक भूमिका का प्रतीक
यह बाजार सिर्फ व्यापारिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा है। इतिहास बताता है कि यहां की महिला व्यापारियों ने सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। विशेष रूप से 1904 और 1939 में हुए प्रसिद्ध नूपी लान आंदोलनों के दौरान महिलाओं ने औपनिवेशिक नीतियों और आर्थिक शोषण के खिलाफ आवाज उठाई थी। इन घटनाओं ने मणिपुर के सामाजिक इतिहास में महिलाओं की भागीदारी को नई पहचान दी।
परंपरा और आत्मनिर्भरता का जीवंत उदाहरण
इमा कीथल आज भी महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता, नेतृत्व क्षमता और सामुदायिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है। सदियों पुरानी यह व्यवस्था न केवल परंपरा को जीवित रखे हुए है, बल्कि यह भी दिखाती है कि संगठित महिला नेतृत्व किसी क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक प्रगति में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यही वजह है कि यह बाजार देश और दुनिया के लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता रहता है।