स्वास्थ्य

ScreenTime – बढ़ता डिजिटल स्क्रीन उपयोग क्यों बन रहा है सेहत के लिए चुनौती…

ScreenTime – मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट और टीवी अब हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। पढ़ाई, नौकरी, बैंकिंग, खरीदारी और लोगों से जुड़े रहने जैसे अधिकांश काम डिजिटल स्क्रीन के माध्यम से ही पूरे होते हैं। ऐसे में स्क्रीन का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करना संभव नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका असंतुलित और जरूरत से ज्यादा उपयोग कई स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बन सकता है। इसलिए स्क्रीन से दूरी नहीं, बल्कि उसका संतुलित इस्तेमाल सबसे जरूरी माना जाता है।

जरूरत से ज्यादा स्क्रीन देखने से बढ़ सकते हैं स्वास्थ्य जोखिम

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहने से आंखों, मांसपेशियों और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि लगातार स्क्रीन देखने वाले लोगों में आंखों का सूखना, जलन, धुंधला दिखाई देना और सिरदर्द जैसी शिकायतें अधिक देखने को मिलती हैं। इसके अलावा एक ही मुद्रा में लंबे समय तक बैठे रहने से गर्दन, कंधे और कमर में दर्द की समस्या भी बढ़ सकती है।

बच्चों से लेकर वयस्कों तक सभी को सतर्क रहने की जरूरत

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल उपकरणों का असर केवल बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि हर आयु वर्ग इससे प्रभावित हो सकता है। हालांकि, बच्चों में इसका प्रभाव अधिक गंभीर माना जाता है क्योंकि अत्यधिक स्क्रीन उपयोग उनके शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास पर असर डाल सकता है। इसी वजह से विशेषज्ञ कम उम्र के बच्चों के स्क्रीन उपयोग पर विशेष ध्यान देने की सलाह देते हैं।

उम्र के अनुसार कितना स्क्रीन उपयोग उचित माना जाता है

स्वास्थ्य संस्थानों की सलाह के अनुसार, दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यथासंभव स्क्रीन से दूर रखना बेहतर माना जाता है। दो से पांच वर्ष की आयु के बच्चों के लिए प्रतिदिन लगभग एक घंटे तक गुणवत्तापूर्ण डिजिटल सामग्री पर्याप्त मानी जाती है। वहीं वयस्कों के लिए कोई निश्चित सीमा तय नहीं है, लेकिन अनावश्यक स्क्रीन उपयोग और लगातार कई घंटे तक मोबाइल या लैपटॉप पर समय बिताने से बचने की सलाह दी जाती है।

आंखों और नींद पर भी पड़ता है असर

विशेषज्ञ बताते हैं कि देर रात तक मोबाइल या अन्य डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल करने से शरीर की प्राकृतिक नींद की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। पर्याप्त और अच्छी नींद नहीं मिलने पर अगले दिन थकान, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और कार्यक्षमता में कमी महसूस हो सकती है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों पर पड़ने वाला दबाव भी बढ़ जाता है, इसलिए समय-समय पर उन्हें आराम देना आवश्यक है।

छोटे-छोटे बदलाव से कम हो सकता है खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ स्क्रीन उपयोग के दौरान नियमित अंतराल पर ब्रेक लेने की सलाह देते हैं। 20-20-20 नियम को आंखों के लिए उपयोगी माना जाता है। इसके तहत हर 20 मिनट बाद लगभग 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखना आंखों को आराम देने में मदद कर सकता है। इसके अलावा हर घंटे कुछ मिनट टहलना और लंबे समय तक एक ही जगह बैठने से बचना भी फायदेमंद माना जाता है।

संतुलित डिजिटल आदतें बनाना है सबसे बेहतर उपाय

विशेषज्ञों के अनुसार, गैर-जरूरी मोबाइल नोटिफिकेशन बंद करना, भोजन के समय स्क्रीन से दूरी रखना और सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल का उपयोग सीमित करना अच्छी आदतें मानी जाती हैं। परिवार के साथ बिना मोबाइल के समय बिताना, बच्चों को आउटडोर खेलों के लिए प्रोत्साहित करना और किताब पढ़ने, योग या संगीत जैसी गतिविधियों को दिनचर्या में शामिल करना भी डिजिटल स्क्रीन पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकता है। आधुनिक जीवन में स्क्रीन का उपयोग जरूरी है, लेकिन संतुलन बनाए रखना ही बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

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