VoterList – एसआईआर जांच में सामने आईं मतदाता रिकॉर्ड की लाखों विसंगतियां
VoterList– उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के पहले चरण में बड़ी संख्या में रिकॉर्ड संबंधी विसंगतियां सामने आई हैं। चुनाव आयोग की समीक्षा के दौरान करीब 19.04 लाख मतदाताओं के विवरण में विभिन्न प्रकार की त्रुटियां दर्ज की गईं। इनमें पारिवारिक आयु संबंधी असंगतियों से लेकर नाम, रिश्तेदारी और पते से जुड़ी गड़बड़ियां शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन रिकॉर्ड की दोबारा जांच की जा रही है और आवश्यक सत्यापन के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

आयु संबंधी आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
जांच के दौरान लगभग 1.99 लाख ऐसे मतदाता चिह्नित किए गए, जिनकी आयु और उनके माता-पिता की आयु के बीच 15 वर्ष या उससे कम का अंतर दर्ज है। इसके अलावा करीब 1.09 लाख मामलों में मतदाता और उनके माता-पिता के बीच 50 वर्ष से अधिक का आयु अंतर पाया गया। चुनाव आयोग के अनुसार, यह स्थिति रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी की शुद्धता की जांच की मांग करती है।
दादा-दादी की उम्र से जुड़े भी मिले असामान्य रिकॉर्ड
समीक्षा में लगभग 92 हजार मतदाताओं के रिकॉर्ड ऐसे पाए गए, जिनमें दादा-दादी या नाना-नानी की आयु और मतदाता की आयु के बीच 40 वर्ष से भी कम का अंतर दर्ज है। कई जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में इस प्रकार की विसंगतियां अपेक्षाकृत अधिक संख्या में सामने आई हैं। इन सभी मामलों का दस्तावेजों के आधार पर सत्यापन किया जाएगा।
अन्य रिकॉर्ड में भी मिलीं कई त्रुटियां
एसआईआर के दौरान लगभग 2.39 लाख ऐसे मामलों की पहचान हुई, जिनमें एक ही परिवार के दो बच्चों के जन्म के बीच नौ महीने से कम का अंतर दर्ज था। इसके अलावा अनेक परिवारों में एक ही मुखिया के नाम पर छह या उससे अधिक मतदाता पंजीकृत पाए गए। नामों की वर्तनी, रिश्तेदारों के विवरण और पहचान संबंधी त्रुटियां भी बड़ी संख्या में दर्ज की गई हैं। विशेष रूप से देहरादून और हरिद्वार जिलों में ऐसे मामलों की संख्या अधिक बताई गई है।
पांच लाख से अधिक मतदाताओं का सत्यापन बाकी
जांच के दौरान राज्यभर में लगभग 5.26 लाख ऐसे मतदाता भी सामने आए, जिनका रिकॉर्ड उपलब्ध पते या अन्य विवरण के आधार पर सत्यापित नहीं हो सका। इनमें सबसे अधिक संख्या ऊधमसिंह नगर जिले की रुद्रपुर विधानसभा क्षेत्र से सामने आई है। इसके अलावा रायपुर, विकासनगर और जसपुर विधानसभा क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता दर्ज किए गए हैं जिनकी मैपिंग नहीं हो सकी।
नोटिस के बाद होगी अंतिम कार्रवाई
चुनाव आयोग के अनुसार, जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां मिली हैं या जिनका सत्यापन अभी बाकी है, उन्हें नियमानुसार नोटिस जारी किए जाएंगे। निर्धारित समय में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने या सत्यापन पूरा होने के बाद ही मतदाता सूची में उनके नाम को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा। आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है।