Travel – केदारनाथ यात्रा में बारिश का असर, श्रद्धालुओं की संख्या में आई बड़ी कमी
Travel – उत्तराखंड में मानसून के सक्रिय होने के साथ ही केदारनाथ धाम की यात्रा पर मौसम का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देने लगा है। यात्रा के शुरुआती चरण में जहां प्रतिदिन 25 हजार से अधिक श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंच रहे थे, वहीं अब यह संख्या काफी घट गई है। बृहस्पतिवार को केवल 949 श्रद्धालुओं ने धाम पहुंचकर दर्शन किए। इसके बावजूद यात्रा आरंभ होने से अब तक कुल 14,13,648 श्रद्धालु केदारनाथ धाम के दर्शन कर चुके हैं, जो इस वर्ष की यात्रा में लगातार बनी आस्था को दर्शाता है।

बारिश के कारण यात्रा की रफ्तार हुई धीमी
लगातार हो रही बारिश और पर्वतीय क्षेत्रों में बदलते मौसम का असर यात्रा की गति पर साफ नजर आ रहा है। प्रतिकूल मौसम की वजह से कई श्रद्धालु अपनी यात्रा स्थगित कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग मौसम अनुकूल होने का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन का मानना है कि मौसम में सुधार होने के बाद यात्रियों की संख्या दोबारा बढ़ सकती है।
कांवड़ यात्रा से बढ़ सकती है श्रद्धालुओं की संख्या
बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के सदस्य डॉ. विनीत पोस्ती ने बताया कि आगामी कांवड़ यात्रा के दौरान केदारनाथ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में फिर से बढ़ोतरी होने की संभावना है। हर वर्ष इस अवधि में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों का रुख करते हैं, जिससे यात्रा में नई गति आने की उम्मीद जताई जा रही है।
पैदल मार्ग के संवेदनशील हिस्सों पर प्रशासन की नजर
गौरीकुंड से भीमबली के बीच स्थित केदारनाथ पैदल मार्ग पर फिलहाल सात स्थान ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें अत्यधिक संवेदनशील माना गया है। इन इलाकों में अचानक पत्थर और बड़े बोल्डर गिरने की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे यात्रियों की आवाजाही प्रभावित होती है। हाल ही में छोड़ी क्षेत्र के पास बोल्डर गिरने के कारण यात्रा करीब तीन दिनों तक बाधित रही थी।
सुरक्षा और मार्ग बहाली के लिए लगातार निगरानी
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि प्रशासन, आपदा प्रबंधन और संबंधित विभागों की टीमें पूरे मार्ग की लगातार निगरानी कर रही हैं। जहां भी भूस्खलन या पत्थर गिरने से रास्ता प्रभावित होता है, वहां तत्काल मशीनों और कर्मचारियों की मदद से मार्ग को दोबारा चालू किया जाता है। प्रशासन का कहना है कि मौसम सामान्य होने और श्रद्धालुओं की संभावित बढ़ती संख्या को देखते हुए सभी आवश्यक तैयारियां पहले से की जा रही हैं, ताकि यात्रा सुरक्षित और सुचारु रूप से संचालित हो सके।