RoadConnectivity – दस साल बाद भी अधूरी पड़ी धुराधारकोट-पिनाऊं सड़क
RoadConnectivity – चमोली जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क सुविधा की कमी आज भी ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। धुराधारकोट से वांक होते हुए पिनाऊं गांव तक प्रस्तावित 23 किलोमीटर सड़क परियोजना स्वीकृति मिलने के करीब एक दशक बाद भी धरातल पर पूरी नहीं हो सकी है। स्थिति यह है कि आपातकालीन हालात में ग्रामीणों को मरीजों को स्ट्रेचर के सहारे कई किलोमीटर पैदल ले जाना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण को लेकर अलग-अलग समय पर दो पूर्व मुख्यमंत्रियों ने घोषणाएं की थीं, लेकिन इसके बावजूद परियोजना अब तक अधूरी है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि लंबे इंतजार के बाद भी क्षेत्र को बुनियादी सुविधा नहीं मिल पाई।
बीमार बुजुर्ग को स्ट्रेचर से ले जाना पड़ा
हाल ही में पिनाऊं गांव में रहने वाले 68 वर्षीय केशर सिंह दानू की तबीयत अचानक खराब हो गई। गांव तक सड़क सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने उन्हें स्ट्रेचर के सहारे करीब आठ किलोमीटर पैदल रास्ता तय कर मुख्य सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद निजी वाहन की मदद से उन्हें अस्पताल भेजा गया।
गांव के लोगों के अनुसार, इस तरह की घटनाएं यहां नई नहीं हैं। बीमार मरीजों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए अक्सर लोगों को डंडी या स्ट्रेचर का सहारा लेना पड़ता है। बरसात और खराब मौसम के दौरान यह मुश्किल और बढ़ जाती है।
वर्षों पहले हुई थी सड़क की घोषणा
स्थानीय प्रतिनिधियों के मुताबिक, धुराधारकोट-वांक-पिनाऊं सड़क को वर्ष 2015-16 में स्वीकृति मिली थी। इसके बाद 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत और 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी सड़क निर्माण को लेकर घोषणा की थी। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि सड़क बनने से क्षेत्र में आवागमन और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच आसान हो जाएगी।
हालांकि, दस साल बीतने के बाद भी सड़क निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार मांग और आश्वासन के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
वन भूमि प्रक्रिया में फंसा मामला
बीडीसी सदस्य प्रदीप दानू ने बताया कि सड़क न बनने से गांव के लोग लंबे समय से परेशान हैं। उनका कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर बार-बार मामला उठाने के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
वहीं, थराली विधायक भूपाल राम टम्टा ने कहा कि सड़क परियोजना की फाइल वन भूमि से संबंधित प्रक्रिया में लंबित है। वन भूमि पत्रावली के निस्तारण के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि लोक निर्माण विभाग को इस मामले में तेजी से काम करने के निर्देश दिए जाएंगे।
आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष
पिनाऊं गांव स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मेजर देव सिंह दानू का गांव माना जाता है, लेकिन आज भी यहां सड़क जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए उन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि सड़क निर्माण समय पर पूरा हो जाता, तो आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना संभव हो पाता। अब ग्रामीण प्रशासन से जल्द निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग कर रहे हैं।