उत्तराखण्ड

Pilgrimage Safety – गंगोत्री में स्नान घाट बंद होने पर पुरोहितों ने जताई आपत्ति

Pilgrimage Safety – गंगोत्री धाम में तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने भागीरथी शिला के आसपास स्थित कुछ स्नान घाटों पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है। प्रशासन की ओर से घाटों के प्रवेश मार्गों को बांस की बैरिकेडिंग लगाकर सीमित किया गया है, ताकि श्रद्धालु जोखिम वाले क्षेत्रों में न जा सकें। इस निर्णय के बाद स्थानीय तीर्थ पुरोहितों ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए घाटों को जल्द खोलने की मांग उठाई है।

प्रशासन का कहना है कि हाल के दिनों में हुई दुर्घटनाओं को देखते हुए यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है। दूसरी ओर, पुरोहितों का मानना है कि इससे श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुष्ठानों और गंगा स्नान में कठिनाई हो रही है।

हाल की घटनाओं के बाद लिया गया फैसला

गंगोत्री क्षेत्र में हाल ही में गंगा नदी के तेज बहाव से जुड़े कुछ हादसे सामने आए थे। पिछले दिनों एक महिला श्रद्धालु के नदी में बह जाने की घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई थी। इससे पहले भी कुछ यात्री तेज धारा की चपेट में आ चुके थे।

इन्हीं घटनाओं के मद्देनजर प्रशासन ने मुख्य स्नान घाट सहित कुछ अन्य स्थानों पर लोगों की आवाजाही सीमित करने का निर्णय लिया। अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और जोखिम वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है।

तीर्थ पुरोहितों ने उठाए सवाल

घाटों को बंद किए जाने के निर्णय पर गंगोत्री धाम से जुड़े कई तीर्थ पुरोहितों ने आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि श्रद्धालु गंगोत्री पहुंचने के बाद गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों की अपेक्षा रखते हैं, लेकिन घाटों पर प्रतिबंध के कारण वे इन परंपराओं का पूरी तरह पालन नहीं कर पा रहे हैं।

पुरोहितों का आरोप है कि लंबे समय से घाटों की संरचना और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की मांग की जा रही थी, लेकिन उस दिशा में पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए। उनका कहना है कि यदि यात्रा शुरू होने से पहले आवश्यक सुधार कार्य पूरे कर लिए जाते, तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।

सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग

स्थानीय धार्मिक प्रतिनिधियों का कहना है कि घाटों को पूरी तरह बंद करने के बजाय वहां अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जा सकती है। उनके अनुसार क्षेत्र में एसडीआरएफ, पुलिस और आईटीबीपी जैसी एजेंसियों की मौजूदगी है, जिनकी सहायता से श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

पुरोहितों का मानना है कि निगरानी बढ़ाकर और सुरक्षित क्षेत्रों को चिन्हित कर श्रद्धालुओं को नियंत्रित तरीके से स्नान की अनुमति दी जा सकती है। इससे धार्मिक गतिविधियां भी प्रभावित नहीं होंगी और सुरक्षा भी बनी रहेगी।

यात्रियों को हो रही असुविधा

चारधाम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगोत्री धाम पहुंचते हैं। ऐसे में घाटों पर प्रतिबंध लगने से कई यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। श्रद्धालु गंगा स्नान को यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं और घाट बंद होने से उनकी धार्मिक भावनाएं भी प्रभावित हो रही हैं।

हालांकि प्रशासन का कहना है कि किसी भी निर्णय का उद्देश्य श्रद्धालुओं को असुविधा पहुंचाना नहीं, बल्कि संभावित दुर्घटनाओं को रोकना है। अधिकारियों का मानना है कि सुरक्षा उपाय अस्थायी हैं और परिस्थितियों के अनुसार उनमें बदलाव किया जा सकता है।

प्रशासन ने दिया आश्वासन

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि कुछ घाटों पर सुरक्षा कारणों से अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया था। उन्होंने कहा कि भागीरथी शिला के निकट स्थित मुख्य स्नान घाट को आवश्यक सुरक्षा इंतजामों के साथ दोबारा खोले जाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि धार्मिक गतिविधियां व्यवस्थित और सुरक्षित वातावरण में संचालित हो सकें।

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