MilkPriceUpdate – उत्तराखंड में आंचल दूध महंगा, जून से लागू होंगी नई दरें
MilkPriceUpdate – उत्तराखंड में आंचल ब्रांड के दूध की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई है। राज्य के दुग्ध सहकारी फेडरेशन ने दूध के दाम में प्रति किलो दो रुपये की वृद्धि का फैसला लिया है। नई दरें देहरादून जिले में एक जून से लागू की जाएंगी, जबकि नैनीताल और हरिद्वार में संशोधित कीमतें पहले ही प्रभाव में आ चुकी हैं। बढ़ती लागत और पैकेजिंग सामग्री के दाम में आई तेजी को इस फैसले की मुख्य वजह माना जा रहा है।

पैकेजिंग लागत बढ़ने का असर
दूध की कीमतों में यह बदलाव ऐसे समय किया गया है जब डेयरी उत्पादों की पैकेजिंग पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार पॉलीथिन और अन्य पैकेजिंग सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी से उत्पादन लागत प्रभावित हुई है। इसी कारण फेडरेशन को दूध की दरों में संशोधन करना पड़ा। हाल ही में निजी डेयरी ब्रांड अमूल ने भी दूध के दाम बढ़ाए थे, जिसके बाद आंचल की नई कीमतों को बाजार परिस्थितियों के अनुरूप कदम माना जा रहा है।
देहरादून में जून से लागू होंगी नई दरें
दुग्ध विकास विभाग के सहायक निदेशक जयदीप अरोड़ा ने जानकारी दी कि हरिद्वार और नैनीताल जिलों में नई कीमतें पिछले सप्ताह से लागू कर दी गई हैं। देहरादून जिले में उपभोक्ताओं को एक जून से बढ़ी हुई दरों पर दूध मिलेगा। विभाग का कहना है कि अलग-अलग जिलों में मांग और वितरण व्यवस्था को देखते हुए चरणबद्ध तरीके से नई दरें लागू की जा रही हैं।
मैदानी जिलों में सबसे अधिक खपत
आंचल दूध की सबसे ज्यादा खपत उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों में होती है। यही कारण है कि फिलहाल केवल तीन प्रमुख जिलों में ही कीमतों में बदलाव किया गया है। डेयरी विभाग का मानना है कि इन इलाकों में उपभोक्ता संख्या अधिक होने के कारण लागत संतुलन बनाए रखने के लिए यह निर्णय जरूरी था।
हजारों पशुपालकों से जुड़ी है व्यवस्था
प्रदेश में दुग्ध सहकारी समितियों के जरिए बड़ी संख्या में पशुपालकों से दूध संग्रह किया जाता है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार करीब 56 हजार पशुपालक इस नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। वर्तमान समय में राज्य में प्रतिदिन लगभग 2.40 लाख लीटर दूध का उपार्जन किया जा रहा है। डेयरी क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि लागत बढ़ने के बावजूद दूध आपूर्ति को नियमित बनाए रखना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा मासिक खर्च
नई दरों के लागू होने के बाद नियमित रूप से पैकेट दूध खरीदने वाले परिवारों के मासिक बजट पर असर पड़ सकता है। खासतौर पर शहरों में रहने वाले उपभोक्ताओं के लिए यह बढ़ोतरी घरेलू खर्च में अतिरिक्त बोझ के रूप में देखी जा रही है। हालांकि विभाग का कहना है कि किसानों और डेयरी संचालन की लागत को ध्यान में रखते हुए यह फैसला आवश्यक था।