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Energy – होर्मुज खुलने की उम्मीद के बावजूद तेल बाजार पर बरकरार है दबाव

Energy – पश्चिम एशिया में लंबे समय तक चले तनाव के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से सामान्य रूप से संचालित होने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल समुद्री मार्ग खुलने से वैश्विक तेल बाजार की चुनौतियां तुरंत समाप्त नहीं होंगी। पिछले कई महीनों के दौरान तेल आपूर्ति, भंडारण और परिवहन व्यवस्था पर पड़े असर की भरपाई में लंबा समय लग सकता है, जिसका प्रभाव आने वाले महीनों तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में दिखाई दे सकता है।

कीमतों पर बनी रह सकती है अनिश्चितता

यूएस एनर्जी इंफोर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के आकलन के अनुसार, जब तक वैश्विक तेल भंडार दोबारा पर्याप्त स्तर तक नहीं पहुंचते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि जैसे-जैसे होर्मुज मार्ग से तेल आपूर्ति सामान्य होगी और मध्य पूर्व का उत्पादन धीरे-धीरे बढ़ेगा, वैसे-वैसे कीमतों में नरमी आ सकती है। मौजूदा आकलन के मुताबिक वर्ष 2027 तक उत्पादन पूरी क्षमता के करीब पहुंचने की संभावना है, जिससे ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत में भी कमी आ सकती है।

वैश्विक मांग पर भी पड़ सकता है असर

ऊर्जा बाजार में लंबे समय तक ऊंची कीमतें बने रहने का असर तेल की मांग पर भी पड़ सकता है। विश्लेषकों का अनुमान है कि अगले वर्ष वैश्विक तेल खपत की वृद्धि की रफ्तार धीमी रह सकती है। हालांकि यदि आपूर्ति पूरी तरह सामान्य होती है और व्यापारिक गतिविधियां स्थिर रहती हैं, तो उसके बाद मांग में फिर से सुधार देखने को मिल सकता है। ऐसे में बाजार की दिशा काफी हद तक उत्पादन और आपूर्ति की बहाली पर निर्भर करेगी।

तेल भंडार पहुंचे निचले स्तर पर

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसियों के अनुसार, संकट के दौरान कई देशों ने घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने रणनीतिक तेल भंडार का बड़े पैमाने पर उपयोग किया। इसके परिणामस्वरूप विकसित देशों के समूह ओईसीडी के तेल भंडार कई दशकों के सबसे निचले स्तर तक पहुंच गए हैं। अमेरिका के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन भंडारों को फिर से भरने में लंबा समय लग सकता है।

आपूर्ति सामान्य होने में रहेंगी चुनौतियां

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि फारस की खाड़ी से तेल का निर्यात तुरंत पहले जैसी स्थिति में नहीं लौटेगा। युद्ध के दौरान प्रभावित समुद्री मार्गों को पूरी तरह सुरक्षित बनाने, तेल टैंकरों की उपलब्धता सामान्य करने और बीमा सेवाओं को बहाल करने जैसी कई प्रक्रियाओं में समय लगेगा। इसके अलावा क्षेत्र के कुछ तेल प्रतिष्ठानों और रिफाइनरियों को हुए नुकसान की मरम्मत भी आपूर्ति बहाली की गति को प्रभावित कर सकती है।

बाजार की नजर अगले चरण पर

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि उत्पादन कितनी तेजी से सामान्य होता है और रणनीतिक तेल भंडार किस गति से दोबारा भरे जाते हैं। फिलहाल निवेशकों और ऊर्जा कंपनियों की नजर आपूर्ति श्रृंखला की बहाली और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों की चाल पर बनी हुई है।

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