Endometriosis – पीरियड्स के दौरान असहनीय दर्द को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी
Endometriosis – मासिक धर्म के दौरान हल्का दर्द होना सामान्य माना जाता है, लेकिन अगर हर महीने दर्द इतना बढ़ जाए कि रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो जाए, बार-बार दर्द निवारक दवाओं की जरूरत पड़े या स्कूल, कॉलेज और कार्यालय जाना प्रभावित होने लगे, तो इसे केवल सामान्य पीरियड्स का हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी स्थिति एंडोमेट्रियोसिस जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकती है, जिसके समय पर इलाज न होने पर प्रजनन क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

एंडोमेट्रियोसिस क्या है और क्यों है चिंता का विषय
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, प्रजनन आयु की लगभग 10 प्रतिशत महिलाएं और किशोरियां एंडोमेट्रियोसिस से प्रभावित हैं। इस बीमारी में गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसी कोशिकाएं गर्भाशय के बाहर, जैसे अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब या पेट के अन्य हिस्सों में विकसित होने लगती हैं। मासिक धर्म चक्र के दौरान ये ऊतक भी हार्मोनल बदलावों से प्रभावित होते हैं, जिससे सूजन, रक्तस्राव, स्कार टिश्यू और लगातार दर्द जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
किन लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए
विशेषज्ञों का कहना है कि एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण हर महिला में अलग हो सकते हैं। कुछ महिलाओं को केवल पीरियड्स के दौरान तेज दर्द होता है, जबकि कई मामलों में पेल्विक हिस्से में लगातार दर्द, संभोग के दौरान या उसके बाद असहजता, मलत्याग या पेशाब के समय दर्द जैसी शिकायतें भी सामने आती हैं। यदि दर्द के साथ उल्टी, बेहोशी, कमर में तेज दर्द या लंबे समय तक असुविधा बनी रहे, तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी माना जाता है।
पहचान में देरी बढ़ा सकती है जोखिम
चिकित्सकों के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस की सबसे बड़ी चुनौती इसकी देर से पहचान है। कई महिलाएं लंबे समय तक इसके लक्षणों को सामान्य पीरियड्स का हिस्सा समझकर अनदेखा करती रहती हैं। यही कारण है कि कई मामलों में बीमारी का पता चलने में वर्षों लग जाते हैं। समय रहते जांच होने पर उपचार शुरू किया जा सकता है, जिससे जटिलताओं का खतरा कम किया जा सकता है।
प्रजनन क्षमता पर भी पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों के मुताबिक, एंडोमेट्रियोसिस महिलाओं में बांझपन के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है। जब गर्भाशय जैसी कोशिकाएं गलत स्थानों पर बढ़ने लगती हैं, तो वे अंडाणु और शुक्राणु के प्राकृतिक मिलन की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर सकती हैं। हालांकि, हर मरीज में यह समस्या नहीं होती, लेकिन समय पर इलाज से गर्भधारण की संभावना बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
बीमारी के कारण और बचाव के उपाय
एंडोमेट्रियोसिस का सटीक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है। हालांकि, विशेषज्ञ आनुवंशिक कारकों, प्रतिरक्षा प्रणाली में गड़बड़ी और हार्मोनल बदलाव, विशेष रूप से एस्ट्रोजन के प्रभाव को संभावित कारण मानते हैं। यदि मासिक धर्म के दौरान लगातार असामान्य दर्द या अन्य लक्षण दिखाई दें, तो स्वयं इलाज करने के बजाय स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना बेहतर विकल्प है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं, नियमित फॉलो-अप और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी से जुड़े जोखिमों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।