स्वास्थ्य

OralHygiene – मुंह की सफाई में लापरवाही बढ़ा सकती है कई गंभीर बीमारियों का खतरा

OralHygiene – अच्छे स्वास्थ्य के लिए केवल संतुलित आहार और नियमित व्यायाम ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि मुंह की साफ-सफाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। कई लोग रोजाना ब्रश तो करते हैं, लेकिन दांतों, मसूड़ों और जीभ की पूरी तरह सफाई पर ध्यान नहीं देते। विशेषज्ञों का कहना है कि मुंह में मौजूद बैक्टीरिया यदि नियंत्रित न किए जाएं तो वे दांतों की समस्याओं के साथ-साथ शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकते हैं।

मुंह में बैक्टीरिया कैसे बनते हैं समस्या

खाना खाने के बाद दांतों पर बचे छोटे-छोटे कण बैक्टीरिया के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करते हैं। समय के साथ यही बैक्टीरिया प्लाक और टार्टर का रूप ले लेते हैं। यदि इनकी नियमित सफाई न हो तो मसूड़ों में सूजन, मुंह से बदबू, ब्रश करते समय खून आना और दांतों का कमजोर होना जैसी परेशानियां शुरू हो सकती हैं। लंबे समय तक लापरवाही बरतने पर दांतों की ऊपरी परत भी प्रभावित हो सकती है, जिससे कैविटी बनने का खतरा बढ़ जाता है।

पूरे शरीर के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मसूड़ों में लगातार बनी रहने वाली सूजन शरीर में इंफ्लेमेशन को बढ़ा सकती है। कई शोधों में यह पाया गया है कि लंबे समय तक रहने वाला इंफ्लेमेशन हृदय संबंधी बीमारियों, डायबिटीज, फेफड़ों के संक्रमण और गर्भावस्था से जुड़ी कुछ जटिलताओं के जोखिम से जुड़ा हो सकता है। हालांकि इसका यह अर्थ नहीं है कि हर व्यक्ति को ये बीमारियां होंगी, लेकिन ओरल हेल्थ और समग्र स्वास्थ्य के बीच संबंध को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

हृदय और फेफड़ों पर भी हो सकता है प्रभाव

विशेषज्ञ बताते हैं कि मसूड़ों में संक्रमण पैदा करने वाले कुछ बैक्टीरिया रक्त प्रवाह के माध्यम से शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंच सकते हैं। कई अध्ययनों में ऐसे संक्रमण और हृदय रोगों के बीच संबंध देखने को मिला है। इसी तरह मुंह के हानिकारक बैक्टीरिया सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं, जिससे विशेष रूप से बुजुर्गों, कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों और अस्पताल में भर्ती मरीजों में निमोनिया जैसे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

नियमित देखभाल से कम हो सकता है जोखिम

दंत चिकित्सकों के अनुसार, अच्छी ओरल हाइजीन अपनाकर इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए दिन में कम से कम दो बार फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से लगभग दो मिनट तक ब्रश करना चाहिए। साथ ही रोजाना फ्लॉस का उपयोग करना, जीभ की सफाई करना और भोजन के बाद कुल्ला करना भी लाभदायक माना जाता है। मीठे और चिपचिपे खाद्य पदार्थों का सीमित सेवन तथा पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी दांतों की सुरक्षा में मदद करता है।

समय-समय पर कराएं दंत परीक्षण

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दांतों या मसूड़ों में किसी भी तरह की परेशानी महसूस होने का इंतजार नहीं करना चाहिए। सामान्य स्थिति में भी हर छह महीने में एक बार दंत चिकित्सक से जांच कराना बेहतर माना जाता है। नियमित जांच से शुरुआती समस्याओं का समय रहते पता चल जाता है और गंभीर जटिलताओं से बचाव संभव हो सकता है। स्वस्थ दांत और मजबूत मसूड़े न केवल बेहतर मुस्कान देते हैं, बल्कि पूरे शरीर के स्वास्थ्य को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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