Census Uttarakhand – चुनाव से पहले जनगणना की तैयारी तेज, बदल सकता है कार्यक्रम
Census Uttarakhand – उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले जनगणना की तैयारियां तेज होने लगी हैं। भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से राज्य के अधिकारियों को आंतरिक स्तर पर तैयार रहने के संकेत दिए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, अभी इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है। मौजूदा कार्यक्रम के अनुसार देशभर में जनगणना का दूसरा चरण अगले साल फरवरी में प्रस्तावित है, लेकिन उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की संभावित समय-सारिणी को देखते हुए यहां तारीखों में बदलाव किया जा सकता है। राज्य में नवंबर-दिसंबर के दौरान जनगणना कराने की तैयारी की चर्चा है।

चुनाव के कारण बदल सकता है राष्ट्रीय कार्यक्रम
जनगणना की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है। पहले चरण में मकान गणना का काम पूरा होने के बाद उत्तराखंड के हिमाच्छादित और दुर्गम इलाकों में दूसरे चरण की प्रक्रिया सितंबर से शुरू की जानी है। इसके बाद देश के अन्य हिस्सों में अगले साल नौ फरवरी से 28 फरवरी के बीच जनगणना कराने की तैयारी है। उत्तराखंड में इसी अवधि के दौरान विधानसभा चुनाव होने की संभावना को देखते हुए राज्य के लिए अलग समय तय किया जा सकता है। हालांकि, अंतिम तारीखों पर फैसला आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
पहली बार राज्य में पहले हो सकती है जनगणना
यदि उत्तराखंड के लिए प्रस्तावित समय में बदलाव किया जाता है और नवंबर-दिसंबर में जनगणना पूरी होती है, तो यह देश के अन्य राज्यों की तुलना में पहले होने वाली प्रक्रिया बन सकती है। राज्य में जनगणना का परीक्षण चरण हरिद्वार में पूरा किया जा चुका है। परीक्षण के दौरान करीब 40 सवालों के आधार पर जानकारी जुटाने की प्रक्रिया परखी गई थी। हालांकि, वास्तविक जनगणना में कितने प्रश्न पूछे जाएंगे, यह अंतिम अधिसूचना और दिशा-निर्देश जारी होने के बाद ही साफ होगा।
131 हिमाच्छादित गांवों में सितंबर से गणना
उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जनगणना की प्रक्रिया सामान्य इलाकों से पहले शुरू होगी। रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी जिलों के 131 हिमाच्छादित गांवों तथा तीन विशेष निकायों—केदारनाथ, बदरीनाथ और गंगोत्री—में एक सितंबर से 30 सितंबर के बीच जनगणना कराई जानी है। इन क्षेत्रों की अनुमानित आबादी करीब 52 हजार बताई गई है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम को ध्यान में रखते हुए इन इलाकों के लिए अलग कार्यक्रम तैयार किया गया है।
स्व-गणना के बाद घर-घर जुटेगा आंकड़ा
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार इन हिमाच्छादित क्षेत्रों में 17 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक स्व-गणना की सुविधा रहेगी। इसके बाद एक सितंबर से 30 सितंबर तक गणनाकर्मी घर-घर जाकर वास्तविक जनसंख्या संबंधी जानकारी दर्ज करेंगे। प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक से पांच अक्तूबर तक पुनरीक्षण चरण आयोजित किया जाएगा। इस चरण का उद्देश्य दर्ज किए गए आंकड़ों की जांच और आवश्यक सुधार करना होगा। इसके लिए एक अक्तूबर को संदर्भ तिथि निर्धारित की गई है।
मोबाइल ऐप के जरिए दर्ज किया जाएगा आंकड़ा
जनगणना निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव के अनुसार, हिमाच्छादित क्षेत्रों में गणना का काम डिजिटल माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए आधिकारिक जनगणना मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा और अधिकारी घर-घर जाकर आवश्यक जानकारी एकत्र करेंगे। डिजिटल प्रक्रिया से आंकड़ों को दर्ज करने और संकलित करने का काम व्यवस्थित तरीके से करने की तैयारी है। राज्य में व्यापक जनगणना के कार्यक्रम को लेकर अब औपचारिक अधिसूचना का इंतजार है। उसके बाद ही उत्तराखंड के लिए अंतिम समय-सारिणी, प्रक्रिया और पूछे जाने वाले प्रश्नों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।