Shoulder Pain – कांवड़ यात्रा के बाद कंधे में दर्द हो तो अपनाएं ये आसान उपाय
Shoulder Pain – सावन के दौरान कांवड़ यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु लंबी दूरी पैदल तय करते हैं और पवित्र गंगाजल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। कई यात्रियों के लिए यह सफर शारीरिक रूप से काफी मेहनत वाला होता है, खासकर तब जब कांवड़ का वजन अधिक हो या उसे लंबे समय तक कंधे पर उठाकर चलना पड़े। लगातार वजन उठाने और कई किलोमीटर पैदल चलने से कंधे, गर्दन और पीठ की मांसपेशियों पर दबाव पड़ सकता है। ऐसे में दर्द, अकड़न, हल्की सूजन या मांसपेशियों में खिंचाव जैसी परेशानी हो सकती है।

अपनी क्षमता के मुताबिक चुनें कांवड़
कांवड़ का वजन तय करते समय केवल उसके आकार या सजावट पर ध्यान देने के बजाय अपनी शारीरिक क्षमता को प्राथमिकता देना जरूरी है। जरूरत से ज्यादा वजन उठाने पर कंधे और गर्दन की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। यात्रा के दौरान शरीर का संतुलन बनाए रखना भी मुश्किल हो सकता है। इसलिए ऐसा वजन चुनें जिसे आप सुरक्षित और आरामदायक तरीके से संभाल सकें।
लगातार चलते रहने के बजाय बीच में आराम करें
लंबे समय तक एक ही तरह का भार उठाने से मांसपेशियों में थकान बढ़ सकती है। यात्रा के दौरान बीच-बीच में रुककर आराम करने से शरीर को कुछ समय के लिए रिकवरी का मौका मिलता है। हर व्यक्ति की क्षमता अलग होती है, इसलिए आराम का अंतराल अपनी स्थिति के अनुसार तय करें। दर्द या अत्यधिक थकान महसूस होने पर उसे नजरअंदाज करके आगे बढ़ते रहना उचित नहीं है।
शुरुआत में दर्द और सूजन पर ठंडी सिकाई
कंधे पर ज्यादा दबाव पड़ने के बाद अगर हल्की सूजन या नया दर्द दिखाई दे रहा है, तो शुरुआती चरण में कपड़े में लपेटकर ठंडी सिकाई की जा सकती है। आमतौर पर 15 से 20 मिनट की सिकाई से असहजता और सूजन को कम करने में मदद मिल सकती है। बर्फ को सीधे त्वचा पर नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि इससे त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है। बाद के चरण में मांसपेशियों में जकड़न होने पर हल्की गर्म सिकाई कुछ लोगों को आराम दे सकती है।
हल्की स्ट्रेचिंग से कम हो सकती है अकड़न
कंधे, गर्दन और पीठ की हल्की स्ट्रेचिंग मांसपेशियों को सक्रिय और लचीला रखने में मदद कर सकती है। यात्रा से पहले शरीर को धीरे-धीरे तैयार करना और बीच में आराम के दौरान हल्की गतिविधि करना उपयोगी हो सकता है। हालांकि, अगर किसी स्ट्रेच से दर्द बढ़ता है तो उसे तुरंत रोक देना चाहिए। चोट या तेज दर्द की स्थिति में बिना विशेषज्ञ की सलाह के व्यायाम करना उचित नहीं है।
दर्द की दवा खुद से लेने से बचें
कंधे में ज्यादा दर्द होने पर कई लोग तुरंत दर्द निवारक दवा लेना शुरू कर देते हैं। लेकिन हर व्यक्ति के लिए हर दवा सुरक्षित नहीं होती और कुछ दवाओं का असर अन्य स्वास्थ्य समस्याओं या पहले से चल रही दवाओं पर पड़ सकता है। इसलिए लगातार या तेज दर्द में चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है। बिना उचित जानकारी के दवा की मात्रा बढ़ाना भी नुकसानदायक हो सकता है।
यात्रा से पहले शरीर को तैयार करें
कांवड़ यात्रा लंबी होने वाली है तो उससे पहले शरीर को धीरे-धीरे तैयार करना उपयोगी रहेगा। कंधे, पीठ और पैरों की क्षमता के अनुसार हल्की कसरत और नियमित पैदल चलने की आदत बनाई जा सकती है। इससे शरीर को लंबे समय तक गतिविधि में रहने की आदत पड़ती है। पर्याप्त पानी पीना, आराम करना और यात्रा के दौरान अपनी शारीरिक क्षमता का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है।
इन संकेतों को सामान्य दर्द समझकर न टालें
अगर कंधे के दर्द के साथ हाथ में सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो, हाथ उठाने में परेशानी हो, तेज सूजन दिखाई दे या दर्द कई दिनों तक कम न हो, तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है। इसी तरह चोट लगने के बाद अचानक तेज दर्द या कंधे की गतिविधि बहुत सीमित हो जाने पर भी डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऐसे लक्षण मांसपेशियों, नसों या जोड़ से जुड़ी समस्या की ओर संकेत कर सकते हैं और सही कारण जानने के लिए विशेषज्ञ की जांच जरूरी हो सकती है।