Menopause – मेनोपॉज के बाद एचआरटी के बढ़ते इस्तेमाल पर विशेषज्ञों ने चेताया
Menopause – मेनोपॉज महिलाओं के जीवन में होने वाली एक स्वाभाविक जैविक प्रक्रिया है, लेकिन इसके बाद शरीर में होने वाले बदलाव कई बार रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकते हैं। चिकित्सकीय तौर पर किसी महिला को लगातार 12 महीने तक मासिक धर्म न होने पर रजोनिवृत्ति की स्थिति माना जाता है। आमतौर पर यह अवस्था 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच आती है, हालांकि हर महिला का अनुभव अलग हो सकता है। हॉट फ्लैश, रात में पसीना, नींद की परेशानी, मूड में बदलाव और योनि में सूखापन जैसे लक्षण कुछ महिलाओं के लिए काफी असहज हो सकते हैं।

एचआरटी से लक्षणों में मिल सकती है राहत
मेनोपॉज के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का स्तर कम हो जाता है। इसी हार्मोनल बदलाव से जुड़े लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी यानी एचआरटी का इस्तेमाल किया जाता है। यह उपचार कुछ महिलाओं में हॉट फ्लैश, रात में पसीना, नींद से जुड़ी परेशानी और योनि में सूखेपन जैसे लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है।
ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में 40 वर्ष से अधिक उम्र की करीब 20 लाख महिलाओं को एचआरटी दी गई। उपलब्ध आंकड़ों में 2020-21 में यह संख्या लगभग आठ लाख बताई गई थी। यानी कुछ वर्षों के दौरान एचआरटी का इस्तेमाल काफी बढ़ा है। हालांकि, किसी महिला के लिए यह उपचार उपयुक्त है या नहीं, इसका फैसला उसकी उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, लक्षणों और व्यक्तिगत जोखिमों को ध्यान में रखकर चिकित्सक करते हैं।
सोशल मीडिया पर बढ़ी ज्यादा खुराक की चर्चा
एचआरटी के बढ़ते इस्तेमाल के साथ विशेषज्ञ सोशल मीडिया पर मिलने वाली स्वास्थ्य संबंधी सलाह को लेकर भी सावधानी बरतने की अपील कर रहे हैं। कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट पर ऐसे दावे दिखाई दे रहे हैं, जिनमें निर्धारित मात्रा से कहीं अधिक हार्मोन लेने की सलाह दी जाती है। विशेष रूप से मानसिक स्वास्थ्य या मेनोपॉज के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए सामान्य मात्रा से दो या तीन गुना अधिक खुराक लेने संबंधी दावों को लेकर चिंता जताई गई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, हार्मोनल दवाओं की मात्रा खुद से बढ़ाना सुरक्षित तरीका नहीं है। एचआरटी का प्रकार और खुराक हर महिला के लिए एक जैसी नहीं होती। इसलिए सोशल मीडिया पर किसी अन्य व्यक्ति के अनुभव को अपनी चिकित्सा जरूरत का आधार बनाना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
कुछ स्वास्थ्य जोखिमों पर भी नजर जरूरी
एचआरटी को कई महिलाओं में मेनोपॉज के लक्षणों के प्रभावी उपचार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसके संभावित जोखिमों को भी समझना जरूरी है। कुछ परिस्थितियों में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टोजेन वाली एचआरटी से स्तन कैंसर के जोखिम में बढ़ोतरी देखी गई है और उपचार कितने समय तक जारी रहता है, यह भी महत्वपूर्ण हो सकता है। कुछ प्रकार की एचआरटी में रक्त के थक्के और स्ट्रोक जैसे जोखिमों पर भी चिकित्सकीय सलाह दी जाती है।
जिन महिलाओं का गर्भाशय मौजूद है, उनके लिए एस्ट्रोजन के साथ प्रोजेस्टोजेन का इस्तेमाल महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि केवल एस्ट्रोजन लेने से गर्भाशय की अंदरूनी परत पर असर पड़ सकता है। असामान्य रक्तस्राव जैसी स्थिति में डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। एचआरटी से जुड़े लाभ और जोखिम व्यक्ति की उम्र, चिकित्सा इतिहास और इस्तेमाल किए जा रहे उपचार के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
विशेषज्ञों ने सोशल मीडिया सलाह से सावधान रहने को कहा
ऑक्सफोर्डशायर की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. केटी बार्बर के अनुसार, सोशल मीडिया ने मेनोपॉज जैसे विषय पर बातचीत को बढ़ाने में सकारात्मक भूमिका निभाई है। महिलाओं के लिए अपने अनुभव साझा करना और लक्षणों के बारे में खुलकर बात करना उपयोगी हो सकता है। हालांकि, समस्या तब पैदा होती है जब व्यक्तिगत अनुभवों को वैज्ञानिक चिकित्सा सलाह के रूप में पेश किया जाने लगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि मेनोपॉज के लक्षण परेशान करने वाले हों तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। एचआरटी शुरू करने, बंद करने या उसकी खुराक में बदलाव का फैसला चिकित्सकीय परामर्श के बाद ही किया जाना चाहिए। किसी भी हार्मोनल उपचार के फायदे और संभावित जोखिमों को समझकर लिया गया फैसला ही सुरक्षित विकल्प माना जाता है।