उत्तराखण्ड

Badrinath Highway – पहली बारिश में दरकी सुरक्षा दीवारें, निर्माण पर उठे सवाल

Badrinath Highway – बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत हाल में कराए गए सुरक्षा और सुधारीकरण कार्यों की गुणवत्ता पर पहली ही बारिश में सवाल उठने लगे हैं। गौचर के पास कमेड़ा और पीपलकोटी के समीप बेलाकूची में नए निर्माण बारिश के दौरान प्रभावित हुए हैं। कमेड़ा में नवनिर्मित सुरक्षा दीवार का करीब 15 मीटर हिस्सा धंस गया, जबकि बेलाकूची में हाईवे किनारे बनाई गई नई दीवार पर कई जगह मोटी दरारें दिखाई दी हैं। इन घटनाओं ने संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों में किए जा रहे निर्माण की मजबूती और उसके टिकाऊपन को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

कमेड़ा में फिर शुरू हुआ भूधंसाव

गौचर के समीप कमेड़ा लंबे समय से भूधंसाव और सड़क की अस्थिरता के लिए संवेदनशील क्षेत्र माना जाता रहा है। यहां करीब 120 मीटर प्रभावित हिस्से में सड़क को सुरक्षित रखने के लिए एंकरिंग और रिटेनिंग वॉल का निर्माण कराया जा रहा था। निर्माण कार्य अभी पूरी तरह पूरा भी नहीं हुआ था कि बारिश के बाद क्षेत्र में दोबारा जमीन खिसकने की स्थिति सामने आ गई। इसके चलते सुरक्षा दीवार का लगभग 15 मीटर हिस्सा नीचे धंस गया। इससे इस क्षेत्र में किए गए उपचार कार्यों की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

बेलाकूची की नई दीवार में आई दरारें

पीपलकोटी के नजदीक बेलाकूची में भी स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। हाईवे किनारे हाल में बनाई गई सुरक्षा दीवार में बारिश के बाद बड़ी और स्पष्ट दरारें दिखाई दी हैं। यह क्षेत्र भी पहले से भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील रहा है। नई दीवार में दरार आने के बाद निर्माण की गुणवत्ता और उसकी संरचनात्मक मजबूती को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है। फिलहाल प्रभावित हिस्से में स्थिति को संभालने और सड़क पर यातायात बनाए रखने के लिए संबंधित संस्था की ओर से जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

एनएचआईडीसीएल कर रहा अस्थायी इंतजाम

प्रभावित स्थानों पर कार्यदायी संस्था एनएचआईडीसीएल की ओर से मिट्टी का भरान कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य फिलहाल सड़क को सुरक्षित रखते हुए वाहनों की आवाजाही सुचारु बनाए रखना है। हालांकि, भूधंसाव वाले इलाकों में केवल तत्काल राहत से समस्या का स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। लगातार बारिश के बीच इन स्थानों पर जमीन की स्थिति में और बदलाव होने की आशंका को देखते हुए तकनीकी जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजमार्ग पर यातायात बनाए रखने के साथ प्रभावित संरचनाओं की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है।

तकनीकी परीक्षण के बाद तय होगा स्थायी उपचार

एनएचआईडीसीएल के अधिकारियों के अनुसार, जिन स्थानों पर भूधंसाव और निर्माण में नुकसान सामने आया है, वहां तकनीकी परीक्षण कराया जाएगा। विशेषज्ञों के माध्यम से जमीन खिसकने के कारणों और निर्माण कार्य पर उसके प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद जरूरत के अनुसार स्थायी उपचार की योजना तैयार की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच का उद्देश्य समस्या की वास्तविक वजह समझना और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न आने के लिए आवश्यक उपाय करना है।

बारिश ने बढ़ाई निर्माण कार्यों की परीक्षा

बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है और मानसून के दौरान इसके कई हिस्से प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से संवेदनशील हो जाते हैं। ऐसे क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा के लिए रिटेनिंग वॉल, एंकरिंग और अन्य तकनीकी उपाय किए जाते हैं। कमेड़ा और बेलाकूची में नए निर्माण के प्रभावित होने के बाद अब इन कार्यों की तकनीकी जांच और गुणवत्ता का आकलन महत्वपूर्ण हो गया है। फिलहाल विभागीय स्तर पर प्रभावित हिस्सों को सुरक्षित रखने की कोशिश जारी है और विस्तृत परीक्षण के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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