उत्तर प्रदेश

SmartMeter – उत्तर प्रदेश में लाखों स्मार्ट बिजली मीटर हुए पोस्टपेड

SmartMeter – उत्तर प्रदेश के मध्यांचल क्षेत्र में बड़ी संख्या में लगाए गए स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटरों को अब पोस्टपेड प्रणाली में बदला जा रहा है। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने अपने अधिकार क्षेत्र के 19 जिलों में स्थापित लगभग 18.67 लाख स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड मोड में परिवर्तित कर दिया है। उपभोक्ताओं को इस बदलाव की जानकारी मोबाइल संदेशों के माध्यम से भेजी जा रही है, जिसमें उनके बिजली बिल और शेष राशि का विवरण भी शामिल है।

निगम के अधिकारियों के अनुसार, यह व्यवस्था उपभोक्ताओं को बिजली उपयोग और भुगतान संबंधी जानकारी अधिक व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लागू की जा रही है। बिजली विभाग ने बताया कि उपभोक्ताओं को अब हर महीने नियमित रूप से बिल की सूचना मोबाइल और व्हाट्सएप के जरिए भेजी जाएगी।

कई जिलों में लागू हुई नई व्यवस्था

मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत आने वाले लखनऊ, रायबरेली, सीतापुर, हरदोई, बरेली, अयोध्या, गोंडा, बहराइच और अन्य जिलों में बड़ी संख्या में स्मार्ट मीटर लगाए गए थे। इनमें से अधिकांश मीटर पहले प्रीपेड मोड में संचालित किए जा रहे थे, जिन्हें अब पोस्टपेड प्रणाली में बदला गया है।

निगम के वाणिज्य निदेशक रजत जुनेजा ने बताया कि उपभोक्ताओं को भेजे जा रहे संदेशों में उनके खाते की मौजूदा स्थिति और बिल से जुड़ी जानकारी शामिल है। इसी प्रकार की प्रक्रिया प्रदेश के अन्य बिजली वितरण निगमों में भी लागू की जा रही है।

हर महीने मोबाइल पर मिलेगा बिजली बिल

पॉवर कॉर्पोरेशन के मुताबिक, उपभोक्ताओं को मई महीने में हुई बिजली खपत का बिल 10 जून तक मोबाइल फोन और व्हाट्सएप पर भेज दिया जाएगा। इसके बाद हर महीने की 10 तारीख तक बिल की जानकारी सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की योजना है।

विभाग का कहना है कि उपभोक्ता स्मार्ट एप के माध्यम से अपने बिल डाउनलोड कर सकेंगे और भुगतान से संबंधित जानकारी भी ऑनलाइन देख पाएंगे। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रणाली से उपभोक्ताओं को समय पर बिल प्राप्त होगा और बिजली खपत पर निगरानी रखना आसान हो सकेगा।

स्मार्ट मीटर जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल

इधर स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की गुणवत्ता जांच को लेकर उपभोक्ता परिषद ने सवाल खड़े किए हैं। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि स्मार्ट मीटरों की जांच जिस प्रयोगशाला में की गई, वह केवल सामान्य बिजली मीटरों की जांच के लिए अधिकृत है।

उनका कहना है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटरों के लिए अलग तकनीकी मानक निर्धारित हैं और उनकी जांच केवल अधिकृत प्रयोगशालाओं में ही की जानी चाहिए। परिषद ने आरोप लगाया कि कई महत्वपूर्ण तकनीकी परीक्षण ऐसे हैं जिनके लिए संबंधित लैब अधिकृत नहीं है।

तकनीकी मानकों को लेकर बढ़ी चर्चा

उपभोक्ता परिषद के अनुसार, स्मार्ट मीटरों में ऊर्जा खपत, संचार क्षमता, रेडियो तकनीक और अन्य तकनीकी पहलुओं से जुड़े परीक्षण आवश्यक होते हैं। भारतीय मानक ब्यूरो के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, ऐसे परीक्षण विशेष मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में ही किए जाने चाहिए।

प्रदेश में स्मार्ट मीटरों को लेकर समय-समय पर उपभोक्ताओं की ओर से शिकायतें भी सामने आती रही हैं। इनमें बिजली खपत के आंकड़ों, बिलिंग प्रक्रिया और तकनीकी गड़बड़ियों से जुड़े मुद्दे शामिल रहे हैं। अब मीटरों को पोस्टपेड मोड में बदले जाने के बाद उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया और विभागीय निगरानी पर भी नजर बनी रहेगी।

Back to top button

Adblock Detected

Please disable your AdBlocker first, and then you can watch everything easily.