BRICS – वैश्विक चुनौतियों के बीच जयशंकर ने बढ़ती भूमिका पर दिया जोर
BRICS – ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बदलते वैश्विक हालात के बीच संगठन की भूमिका को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में दुनिया कई तरह की जटिल परिस्थितियों का सामना कर रही है, जिनमें अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, आर्थिक दबाव, व्यापारिक अस्थिरता और तकनीकी बदलाव प्रमुख हैं। ऐसे माहौल में विकासशील देशों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की नजरें अब BRICS जैसे मंचों पर टिकी हुई हैं।

जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रही है और ऐसे समय में संतुलित, सहयोगात्मक और व्यावहारिक दृष्टिकोण की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है। उन्होंने कहा कि BRICS सदस्य देशों के बीच बढ़ता सहयोग वैश्विक स्तर पर स्थिरता और संवाद को मजबूत करने में सहायक हो सकता है।
बैठक को बताया रणनीतिक संवाद का मंच
विदेश मंत्री ने कहा कि BRICS देशों की यह बैठक केवल औपचारिक चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर साझा सोच विकसित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बहुपक्षीय सहयोग आज की दुनिया की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है और विभिन्न देशों के बीच निरंतर संवाद से ही साझा चुनौतियों का समाधान संभव है।
जयशंकर के अनुसार, BRICS मंच ने बीते वर्षों में आर्थिक सहयोग, विकास, व्यापार और वैश्विक नीति निर्माण से जुड़े कई मुद्दों पर प्रभावी भागीदारी दर्ज कराई है। उन्होंने यह भी कहा कि सदस्य देशों के बीच बढ़ते तालमेल से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विकासशील देशों की आवाज को मजबूती मिली है।
भारत की अध्यक्षता में लगातार हो रही बैठकें
विदेश मंत्री ने जानकारी दी कि भारत की अध्यक्षता के दौरान अब तक 80 से अधिक BRICS बैठकों का आयोजन किया जा चुका है। इन बैठकों में सदस्य देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और साझा प्राथमिकताओं पर चर्चा की है। उन्होंने कहा कि भारत लगातार ऐसे प्रयास कर रहा है जिससे संगठन अधिक समावेशी और प्रभावी बन सके।
भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और इसी क्रम में कई स्तरों पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जयशंकर ने कहा कि भारत की प्राथमिकता सदस्य देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाना और विकास से जुड़े मुद्दों पर साझा पहल को मजबूत करना है।
नए सदस्य देशों के समावेश पर भी हुई चर्चा
अपने संबोधन में विदेश मंत्री ने BRICS के विस्तार और नए सदस्य देशों की भागीदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संगठन के विस्तार के साथ उसके ढांचे और कार्य प्रणाली को समय के अनुसार मजबूत बनाना जरूरी है। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि नए सदस्य देशों के लिए BRICS के मूल सिद्धांतों और साझा प्राथमिकताओं को समझना बेहद महत्वपूर्ण होगा।
उन्होंने कहा कि संगठन की प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए सभी सदस्य देशों के बीच सहमति और सहयोग आवश्यक है। BRICS को भविष्य की वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने पर भी बैठक में चर्चा हुई।
ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और तकनीक पर जताई चिंता
जयशंकर ने वैश्विक विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य संकट, उर्वरक आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में BRICS देशों की भूमिका और जिम्मेदारी दोनों बढ़ जाती हैं।
विदेश मंत्री ने सप्लाई चेन को मजबूत बनाने और बाजारों की स्थिरता पर भी जोर दिया। साथ ही उन्होंने जलवायु परिवर्तन को गंभीर वैश्विक चुनौती बताते हुए कहा कि सतत विकास के लिए सभी देशों को साझा लेकिन संतुलित जिम्मेदारियों के सिद्धांत पर आगे बढ़ना होगा। तकनीकी बदलावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नई तकनीकों का उपयोग वैश्विक विकास और बेहतर प्रशासन के लिए किया जाना चाहिए।