Hydration – 30 की उम्र के बाद महिलाओं के लिए क्यों जरूरी है सही मात्रा में पानी पीना…
Hydration – 30 वर्ष की आयु पार करने के बाद महिलाओं के शरीर में कई स्वाभाविक बदलाव दिखाई देने लगते हैं। हार्मोन में होने वाले परिवर्तन, बदलती जीवनशैली, काम का बढ़ता दबाव और मेटाबॉलिज्म की गति में अंतर स्वास्थ्य पर असर डाल सकते हैं। ऐसे समय में पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना शरीर के सामान्य कार्यों को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पानी की सही मात्रा शरीर को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती है।

हर महिला की पानी की जरूरत अलग हो सकती है
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सभी महिलाओं के लिए पानी की एक समान मात्रा तय नहीं की जा सकती। यह आवश्यकता उम्र, वजन, दैनिक शारीरिक गतिविधि, मौसम, स्वास्थ्य संबंधी स्थिति और खानपान की आदतों पर निर्भर करती है। इसलिए किसी एक निश्चित मात्रा को सभी पर लागू नहीं किया जा सकता। शरीर की जरूरत को समझते हुए ही पानी का सेवन करना अधिक उपयुक्त माना जाता है।
सामान्य तौर पर कितनी मात्रा में तरल लेना उचित
विशेषज्ञों की सलाह के मुताबिक स्वस्थ वयस्क महिलाओं को पूरे दिन में लगभग 2.7 लीटर तरल पदार्थ लेने का लक्ष्य रखना चाहिए। इस मात्रा में केवल सादा पानी ही नहीं, बल्कि दूध, सूप, बिना अतिरिक्त चीनी वाले पेय और फल-सब्जियों से मिलने वाला प्राकृतिक पानी भी शामिल होता है। केवल पीने वाले पानी की मात्रा व्यक्ति की परिस्थितियों के अनुसार कम या अधिक हो सकती है।
किन परिस्थितियों में बढ़ जाती है पानी की आवश्यकता
कुछ स्थितियों में शरीर को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक पानी की जरूरत पड़ सकती है। तेज गर्मी या अधिक उमस वाले मौसम में, नियमित व्यायाम या जिम करने के दौरान, लंबे समय तक धूप में रहने पर तथा बुखार, उल्टी या दस्त जैसी स्वास्थ्य समस्याओं के समय शरीर से पानी तेजी से निकलता है। गर्भावस्था और स्तनपान की अवधि में भी पर्याप्त तरल पदार्थ लेना आवश्यक माना जाता है, ताकि शरीर की जरूरतें पूरी हो सकें।
पर्याप्त पानी पीने से मिल सकते हैं कई स्वास्थ्य लाभ
नियमित रूप से पर्याप्त पानी पीने से शरीर में पानी का संतुलन बना रहता है और कई शारीरिक प्रक्रियाएं सामान्य रूप से काम करती हैं। यह पाचन तंत्र को बेहतर ढंग से कार्य करने में सहायता कर सकता है, त्वचा की नमी बनाए रखने में मददगार माना जाता है और कब्ज की संभावना को कम करने में भी सहयोग कर सकता है। इसके अलावा शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने, किडनी के सामान्य कामकाज को समर्थन देने तथा थकान और कमजोरी की भावना को कम करने में भी पर्याप्त पानी का योगदान माना जाता है।
कम पानी पीने पर शरीर दे सकता है ये संकेत
यदि शरीर को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है तो कुछ सामान्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं। बार-बार प्यास लगना, गहरे रंग का मूत्र, मुंह का सूखना, सिरदर्द, चक्कर आना, लगातार थकान महसूस होना और कब्ज जैसी समस्याएं इस बात का संकेत हो सकती हैं कि शरीर को अधिक तरल पदार्थ की आवश्यकता है। ऐसे संकेतों को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते पानी के सेवन पर ध्यान देना बेहतर माना जाता है।
जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी हो सकता है नुकसानदायक
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि बहुत कम समय में अत्यधिक मात्रा में पानी पीना स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता। इससे शरीर में सोडियम का स्तर असामान्य रूप से कम हो सकता है, जो गंभीर चिकित्सीय स्थिति का कारण बन सकता है। इसलिए पानी का सेवन हमेशा अपनी शारीरिक जरूरत, मौसम और चिकित्सकीय सलाह के अनुरूप ही करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को पहले से किडनी, हृदय या अन्य गंभीर बीमारी है, तो पानी की मात्रा तय करने के लिए डॉक्टर की सलाह लेना अधिक उचित रहेगा।