उत्तर प्रदेश

ChildMarriage – उत्तर प्रदेश में बाल विवाह के मामलों में दर्ज हुई उल्लेखनीय कमी

ChildMarriage – उत्तर प्रदेश में बाल विवाह की घटनाओं में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (2023-24) के ताजा आंकड़ों के अनुसार राज्य में कम उम्र में विवाह के मामलों में पहले की तुलना में स्पष्ट कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा, जागरूकता अभियानों और महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े प्रयासों का सकारात्मक असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है।

रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के अधिकांश जिलों में बाल विवाह की दर काफी कम हो चुकी है। केवल कुछ चुनिंदा जिलों में यह समस्या अपेक्षाकृत अधिक बनी हुई है। सामाजिक संगठनों और सरकारी विभागों द्वारा लगातार चलाए गए जागरूकता कार्यक्रमों को इस बदलाव का प्रमुख कारण माना जा रहा है।

बेटियों की शिक्षा पर बढ़ा परिवारों का ध्यान

पिछले कुछ वर्षों में अभिभावकों की सोच में भी बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां कई क्षेत्रों में कम उम्र में विवाह को प्राथमिकता दी जाती थी, वहीं अब बड़ी संख्या में परिवार बेटियों की शिक्षा और भविष्य को अधिक महत्व दे रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च शिक्षा, कौशल विकास कार्यक्रमों और सरकारी योजनाओं की बढ़ती पहुंच ने भी समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में भूमिका निभाई है। यही वजह है कि बाल विवाह से जुड़े आंकड़ों में लगातार सुधार दर्ज किया जा रहा है।

राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति में प्रदेश

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के अनुसार, राज्य में 18 वर्ष से कम आयु में विवाह करने वाली लड़कियों का प्रतिशत घटकर 13.7 हो गया है। इससे पहले यह आंकड़ा 15.8 प्रतिशत दर्ज किया गया था, जबकि वर्ष 2015-16 में यह 21.1 प्रतिशत था।

दिलचस्प बात यह है कि यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत 20.1 प्रतिशत से काफी बेहतर है। इसी प्रकार पुरुषों के मामले में भी कम उम्र में विवाह की दर में कमी देखी गई है। 21 वर्ष से पहले विवाह करने वाले पुरुषों का प्रतिशत घटकर 19.5 हो गया है, जो पहले 23 प्रतिशत था।

कुछ जिलों में अब भी बनी हुई है चुनौती

हालांकि राज्य स्तर पर तस्वीर बेहतर हुई है, लेकिन कुछ जिलों में बाल विवाह की समस्या अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। सर्वेक्षण के अनुसार ललितपुर में यह दर सबसे अधिक बनी हुई है। यहां पहले 42 प्रतिशत लड़कियों का विवाह कम उम्र में होता था, जो अब घटकर 40 प्रतिशत रह गया है।

बलरामपुर में भी बाल विवाह के मामलों में कमी आई है और यह दर 37.2 प्रतिशत से घटकर 35 प्रतिशत पर पहुंची है। इसी तरह श्रावस्ती और गोंडा जैसे जिलों में भी सुधार दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन क्षेत्रों में जागरूकता और शिक्षा कार्यक्रमों को और मजबूत करने की जरूरत है।

किशोरियों की गर्भावस्था बढ़ने से बढ़ी चिंता

रिपोर्ट में एक ऐसा पहलू भी सामने आया है जिसने नीति निर्माताओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया है। जहां एक ओर बाल विवाह के मामलों में कमी आई है, वहीं किशोरियों में गर्भावस्था के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है।

15 से 19 वर्ष आयु वर्ग की लड़कियों में गर्भावस्था या मातृत्व की दर पहले 2.9 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 3.5 प्रतिशत हो गई है। यह संकेत देता है कि स्वास्थ्य जागरूकता और किशोरियों की सुरक्षा के क्षेत्र में अभी और प्रयासों की आवश्यकता है।

स्वास्थ्य और शिक्षा पर लगातार काम की जरूरत

पूर्व महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. बद्री विशाल का कहना है कि राज्य में शिक्षा का स्तर बढ़ने और जागरूकता फैलने से बाल विवाह की घटनाओं में कमी आई है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का भी इसमें योगदान रहा है।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किशोरावस्था में गर्भावस्था के बढ़ते मामलों को गंभीरता से लेने की जरूरत है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और सामाजिक संस्थाओं को मिलकर नए स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने होंगे, ताकि लड़कियों के स्वास्थ्य और भविष्य को बेहतर तरीके से सुरक्षित किया जा सके।

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