उत्तर प्रदेश

CBIProbe – बेसिक शिक्षा विभाग वित्तीय अनियमितता मामले में कई जिलों में जांच

CBIProbe – उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के निर्देशों के बाद एजेंसी ने मामला दर्ज कर विभिन्न जिलों में कार्रवाई शुरू की है। बुधवार को अमेठी, लखनऊ, कुशीनगर, अयोध्या और प्रतापगढ़ सहित कई स्थानों पर जांच से जुड़ी गतिविधियां संचालित की गईं।

मामला विभागीय निधियों के कथित दुरुपयोग और वित्तीय लेन-देन में अनियमितताओं से जुड़ा बताया जा रहा है। जांच एजेंसी अब उपलब्ध दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर पूरे घटनाक्रम की विस्तृत पड़ताल कर रही है।

अमेठी में सीबीआई की विशेष जांच

जांच के तहत सीबीआई की कई टीमें अमेठी पहुंचीं, जहां विभागीय अभिलेखों और संबंधित व्यक्तियों से जानकारी जुटाई गई। अधिकारियों ने विभिन्न क्षेत्रों में जाकर मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ की और आवश्यक दस्तावेजों की जांच की।

सूत्रों के अनुसार, टीमों ने गौरीगंज क्षेत्र के कई गांवों और अन्य स्थानों का भी दौरा किया। जांच का उद्देश्य कथित वित्तीय लेन-देन की श्रृंखला को समझना और धनराशि के प्रवाह से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करना है।

अभिलेखों और केस रिकॉर्ड की समीक्षा

सीबीआई की एक टीम गौरीगंज कोतवाली भी पहुंची, जहां अधिकारियों ने मामले से संबंधित दस्तावेजों और पूर्व जांच रिकॉर्ड का अध्ययन किया। जांच एजेंसी ने विवेचना से जुड़े अभिलेखों, केस डायरी और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड की जानकारी जुटाई।

अधिकारियों का ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि विभागीय धनराशि किन खातों में स्थानांतरित हुई और इस प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही। इसी आधार पर आगे की जांच को दिशा दी जा रही है।

कई जिलों में समानांतर कार्रवाई

अमेठी के अलावा लखनऊ, अयोध्या, प्रतापगढ़ और कुशीनगर में भी जांच एजेंसी की टीमों ने संबंधित व्यक्तियों और दस्तावेजों की जांच की। सीबीआई विभिन्न स्थानों से प्राप्त जानकारियों को जोड़कर पूरे मामले की व्यापक तस्वीर तैयार करने का प्रयास कर रही है।

फिलहाल एजेंसी ने जांच की प्रगति को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही तथ्यों की आधिकारिक जानकारी सामने आएगी।

विभागीय जांच में सामने आई थीं अनियमितताएं

इस मामले की शुरुआत विभागीय स्तर पर हुई जांच से हुई थी, जिसमें वित्तीय लेन-देन से संबंधित कई अनियमितताओं की ओर संकेत मिला था। प्रारंभिक जांच में कुछ भुगतान और खातों के संचालन को लेकर सवाल उठे थे, जिसके बाद मामला आगे बढ़ा।

बताया गया कि अवशेष देयक, सामान्य भविष्य निधि और बीमा भुगतान जैसी मदों से जुड़ी धनराशि के लेन-देन की जांच की गई थी। इसी दौरान कथित वित्तीय गड़बड़ियों के संकेत मिलने पर विस्तृत जांच की मांग उठी।

विभिन्न खातों में धन हस्तांतरण की जांच

जांच के दौरान कुछ खातों में बड़ी रकम स्थानांतरित होने की जानकारी सामने आई थी। विभागीय अभिलेखों के आधार पर यह देखा जा रहा है कि धनराशि किन खातों में पहुंची और उन लेन-देन का आधार क्या था।

मामले में शिक्षकों, विभागीय कर्मचारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के नाम भी जांच के दायरे में आए थे। हालांकि, अंतिम जिम्मेदारी और कानूनी स्थिति का निर्धारण जांच पूरी होने के बाद ही किया जाएगा।

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद आगे बढ़ी जांच

हाईकोर्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इसे सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया था। इसके बाद संबंधित अभिलेख जांच एजेंसी को उपलब्ध कराए गए और अब सीबीआई पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कर रही है।

जांच एजेंसी का मुख्य फोकस वित्तीय लेन-देन की प्रत्येक कड़ी की जांच करना और यह पता लगाना है कि कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति क्या थी। आने वाले समय में जांच से जुड़े और तथ्य सामने आने की संभावना है।

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