AyodhyaLandCase – फिर चर्चा में आई राम मंदिर जमीन खरीद मामलों की जांच
AyodhyaLandCase – राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा मामले की जांच के बीच अब जमीन खरीद से जुड़े पुराने विवाद भी एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। मंदिर निर्माण के लिए वर्ष 2020 और उसके बाद हुई कुछ भूमि खरीद को लेकर लगाए गए आरोपों पर गठित राधेश्याम मिश्रा जांच समिति की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है। इसी बीच विशेष जांच दल (SIT) ने इन मामलों से जुड़े कुछ दस्तावेजों की भी समीक्षा शुरू कर दी है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और किसी भी आरोप पर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

जमीन खरीद को लेकर पहले भी उठे थे सवाल
राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई कुछ जमीनों के सौदों पर पहले भी विवाद हुआ था। आरोप लगाया गया था कि कुछ भूखंड बाजार मूल्य से कहीं अधिक कीमत पर खरीदे गए। एक मामले में दावा किया गया कि एक जमीन पहले कम कीमत पर खरीदी गई और कुछ ही समय बाद उसे कई गुना अधिक मूल्य पर ट्रस्ट को बेचा गया। इसी तरह एक अन्य सौदे में भी कीमत को लेकर सवाल उठाए गए थे। इन आरोपों की जांच के लिए राज्य सरकार ने राधेश्याम मिश्रा समिति का गठन किया था।
जांच समिति की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं
विवाद सामने आने के बाद गठित जांच समिति को तथ्यों की पड़ताल कर रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी गई थी। उस समय सरकार ने अदालत में भी समिति द्वारा जांच किए जाने की जानकारी दी थी। हालांकि, समिति की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। इस कारण पुराने आरोप एक बार फिर चर्चा में हैं। आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जांच रिपोर्ट की वर्तमान स्थिति क्या है।
एसआईटी को सौंपे गए दस्तावेज
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने हाल ही में एसआईटी के समक्ष कुछ दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं। उनका दावा है कि इन दस्तावेजों में भूमि खरीद से जुड़े कई लेनदेन का विवरण मौजूद है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संपत्तियां बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर खरीदी गईं, जिससे आर्थिक नुकसान हुआ। हालांकि, ये आरोप अभी जांच के अधीन हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
विभिन्न भूमि सौदों की हो रही पड़ताल
एसआईटी अब प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर विभिन्न भूमि सौदों की जांच कर रही है। कुछ मामलों में खरीद मूल्य, विक्रेताओं की भूमिका और दस्तावेजों की वैधता की समीक्षा की जा रही है। इसके अलावा कुछ अन्य भूखंडों से जुड़े लेनदेन और राजस्व अभिलेखों की भी जांच की जा रही है, ताकि पूरे मामले की तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट हो सके।
जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी स्थिति
जांच एजेंसियों का कहना है कि सभी उपलब्ध दस्तावेज, राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के बयान जांच प्रक्रिया का हिस्सा बनाए जा रहे हैं। फिलहाल किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जांच निष्पक्ष और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है तथा आवश्यक होने पर आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।