AviationFuel – जेवर एयरपोर्ट के बाद एटीएफ टैक्स अंतर बना बड़ा मुद्दा
AviationFuel – नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन की तैयारी के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एयर टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ पर लगने वाले वैट को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बीच टैक्स दरों में बड़ा अंतर विमानन कंपनियों के लिए आर्थिक दृष्टि से अहम बनता जा रहा है। जानकारों का मानना है कि यह अंतर आने वाले समय में उड़ानों की योजना और संचालन के फैसलों को प्रभावित कर सकता है।

दिल्ली और यूपी के बीच टैक्स का बड़ा अंतर
इस समय दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एटीएफ पर करीब 25 प्रतिशत वैट लगाया जाता है, जबकि उत्तर प्रदेश में यही दर केवल 1 प्रतिशत है। यह अंतर विमानन कंपनियों के लिए लागत में बड़ा फर्क पैदा करता है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी एयरलाइन की कुल संचालन लागत में ईंधन का हिस्सा लगभग 35 से 40 प्रतिशत तक होता है। ऐसे में टैक्स की दरों में बदलाव सीधे मुनाफे और खर्च पर असर डालता है।
ईंधन लागत में भारी बचत की संभावना
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में एटीएफ की कीमत करीब 96 हजार रुपये प्रति किलोलीटर है, जिस पर वैट जुड़ने के बाद लागत काफी बढ़ जाती है। इसके विपरीत, उत्तर प्रदेश में यही ईंधन अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध है और उस पर टैक्स भी बेहद कम है। उदाहरण के तौर पर, लखनऊ से दिल्ली के बीच एक सामान्य उड़ान में करीब 3 किलोलीटर ईंधन की खपत होती है। यदि एयरलाइन दिल्ली के बजाय जेवर से ईंधन भरती है, तो एक उड़ान में ही हजारों रुपये की बचत संभव है। लंबे समय में यह बचत करोड़ों तक पहुंच सकती है।
एयरलाइंस की रणनीति में बदलाव के संकेत
एयरपोर्ट से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि कम टैक्स वाले राज्यों में ईंधन भरवाने की प्रवृत्ति पहले भी देखी गई है। ऐसे में जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद कई एयरलाइंस अपने संचालन मॉडल की समीक्षा कर सकती हैं। कम लागत वाले विकल्प उन्हें अधिक आकर्षक लग सकते हैं, जिससे कुछ उड़ानों का रुख धीरे-धीरे जेवर की ओर बढ़ सकता है। इसका असर दिल्ली एयरपोर्ट के यात्री और उड़ान संतुलन पर भी पड़ सकता है।
क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर पड़ सकता है असर
कम लागत वाले हवाई अड्डे आमतौर पर ज्यादा उड़ानों को आकर्षित करते हैं। इससे न केवल यात्री संख्या बढ़ती है, बल्कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी भी मजबूत होती है। जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद यह संभावना जताई जा रही है कि एनसीआर के भीतर हवाई यातायात का संतुलन कुछ हद तक बदल सकता है। इससे यात्रियों को विकल्प बढ़ने का लाभ मिल सकता है, वहीं एयरलाइंस को भी अपने नेटवर्क को नए सिरे से व्यवस्थित करना पड़ सकता है।
सरकार की नीति और भविष्य की दिशा
उत्तर प्रदेश सरकार ने हवाई सेवाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जनवरी 2022 में एटीएफ पर वैट को घटाकर 1 प्रतिशत कर दिया था। इससे पहले यह दर काफी अधिक थी। इसके अलावा क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना के तहत 2027 तक वैट में राहत देने का निर्णय भी लिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि यह नीति नए एयरपोर्ट के विकास और निवेश को आकर्षित करने में सहायक साबित हो सकती है।
अन्य राज्यों से तुलना में यूपी की स्थिति
देश के विभिन्न राज्यों में एटीएफ पर वैट की दरें अलग-अलग हैं। जहां उत्तर प्रदेश और लद्दाख में यह दर 1 प्रतिशत है, वहीं राजस्थान और उत्तराखंड में 2 प्रतिशत के आसपास है। दूसरी ओर, कुछ राज्यों में यह दर काफी अधिक है, जिसमें दिल्ली सबसे ऊपर है। इस अंतर के कारण एयरलाइंस अपनी लागत को ध्यान में रखते हुए ईंधन भरने के स्थान का चयन करती हैं।