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SugarExport – वैश्विक कीमतों के दबाव में घट सकता है भारत का चीनी निर्यात

SugarExport – भारत चालू 2025-26 विपणन सत्र में अनुमान से कम चीनी निर्यात कर सकता है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, वैश्विक बाजार में कीमतों की मौजूदा स्थिति और निर्यात लाभ में कमी के कारण इस बार निर्यात की रफ्तार धीमी रहने की संभावना है। अनुमान लगाया जा रहा है कि पूरे सत्र के दौरान देश से करीब 7.5 से 8 लाख टन चीनी ही विदेशी बाजारों तक पहुंच पाएगी।

भारत दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक देशों में शामिल है और यहां चीनी निर्यात सरकार द्वारा तय कोटा प्रणाली के तहत नियंत्रित किया जाता है। इस व्यवस्था के जरिए विभिन्न चीनी मिलों को निर्यात की अनुमति दी जाती है ताकि घरेलू आपूर्ति और कीमतों का संतुलन बना रहे।

सरकार ने पहले दी थी अधिक निर्यात की अनुमति

खाद्य मंत्रालय ने इस विपणन सत्र की शुरुआत में 15 लाख टन चीनी निर्यात की मंजूरी दी थी। बाद में अतिरिक्त 5 लाख टन का कोटा भी खोला गया, लेकिन अब तक उसका सीमित उपयोग ही हो पाया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अतिरिक्त कोटे में से केवल एक छोटा हिस्सा ही मंजूर हो सका है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें फिलहाल भारतीय निर्यातकों के लिए ज्यादा आकर्षक नहीं हैं। ऐसे में कई चीनी मिलें उपलब्ध कोटे का पूरा इस्तेमाल करने के बजाय घरेलू बाजार पर ध्यान बनाए हुए हैं।

मार्च तक हो चुका है सीमित निर्यात

अधिकारियों के मुताबिक, मार्च की शुरुआत तक भारत लगभग 5 लाख टन चीनी का निर्यात कर चुका था। हालांकि सीजन की शुरुआत में निर्यात गतिविधियां तेज थीं, लेकिन बाद में वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के चलते इसकी गति धीमी हो गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक चीनी कीमतों और शिपिंग लागत के बीच संतुलन नहीं बनने से भारतीय कंपनियों को निर्यात में अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा। इसी वजह से कई निर्यात अनुबंध आगे नहीं बढ़ पाए हैं।

घरेलू मांग के पैटर्न में दिख रहा बदलाव

हाल के वर्षों में देश के भीतर चीनी खपत के तरीके में भी बदलाव देखने को मिला है। अधिकारियों का कहना है कि मांग में पहले जैसी तेजी नहीं रही और खपत लगभग स्थिर बनी हुई है। इसके कारण घरेलू बाजार में अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध हो रहा है।

उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि उत्पादन में मामूली वृद्धि और स्थिर मांग के कारण इस बार अधिशेष चीनी की मात्रा अपेक्षा से अधिक हो सकती है। हालांकि निर्यात में कमी के बावजूद घरेलू आपूर्ति को लेकर फिलहाल किसी प्रकार की चिंता नहीं जताई गई है।

उत्पादन में दर्ज हुई हल्की बढ़ोतरी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में अब तक देश का चीनी उत्पादन लगभग 27.5 मिलियन टन तक पहुंच चुका है। पूरे सत्र में कुल उत्पादन 28 मिलियन टन से अधिक रहने का अनुमान लगाया गया है। यह पिछले विपणन सत्र की तुलना में थोड़ा अधिक माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि उत्पादन में वृद्धि के बावजूद वैश्विक बाजार की स्थिति भारतीय निर्यातकों के लिए चुनौती बनी हुई है। आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय कीमतों और मांग में बदलाव के आधार पर निर्यात के अंतिम आंकड़े तय होंगे।

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