Student Protest – शशि थरूर ने माना, छात्रों के मुद्दों पर कम रहा असर…
Student Protest – कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने छात्र मुद्दों को लेकर पार्टी के हालिया अभियान पर आत्ममंथन की जरूरत बताई है। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि कॉकरेच जनता पार्टी (सीजेपी) ने जिन मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया, उनमें से कई विषय कांग्रेस के छात्र संपर्क अभियान ‘छात्रों की गूंज’ में पहले ही उठाए जा चुके थे। हालांकि, थरूर ने यह भी स्वीकार किया कि कांग्रेस का अभियान सीजेपी के आंदोलन जैसी व्यापक सार्वजनिक प्रतिक्रिया हासिल नहीं कर पाया। उनके इस बयान ने छात्र राजनीति और युवाओं तक विपक्षी दलों की पहुंच को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

थरूर ने अभियान के असर पर उठाए सवाल
मुंबई में इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर बातचीत के दौरान थरूर ने कांग्रेस के छात्र अभियान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर सीजेपी ने जिन विषयों को लेकर आवाज उठाई, कांग्रेस उनसे पहले ही संबंधित मुद्दे उठा चुकी थी। उनके मुताबिक, ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने छात्रों से परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर बातचीत की थी।
थरूर ने यह भी माना कि पार्टी को इस बात पर विचार करना चाहिए कि उसके अभियान को छात्रों के बीच अपेक्षित समर्थन क्यों नहीं मिला। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस छात्रों की समस्याओं को पर्याप्त रूप से समझ नहीं पाई या फिर युवाओं, खासकर नई पीढ़ी की अपेक्षाओं को पहचानने में पार्टी से कहीं चूक हुई।
जून से शुरू हुआ था सीजेपी का आंदोलन
कॉकरेच जनता पार्टी ने नीट-यूजी 2026 में कथित पेपर लीक के विरोध में 20 जून से आंदोलन शुरू किया था। संगठन ने मामले में जवाबदेही तय करने के साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। समय के साथ यह आंदोलन युवाओं की भागीदारी के कारण चर्चा में आया और इसे जेन जी के प्रमुख प्रदर्शनों में से एक के रूप में प्रचारित किया गया।
शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के छात्रों की मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने के बाद आंदोलन को और समर्थन मिला। इसके बाद कई छात्र और कार्यकर्ता भी प्रदर्शन से जुड़े।
संसद मार्च के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद
सीजेपी ने 20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान किया था। हालांकि, मार्च से पहले वांगचुक को जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने की जानकारी सामने आई। निर्धारित दिन प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के बाद मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया। विपक्षी दलों की ओर से पुलिस कार्रवाई और कथित बल प्रयोग को लेकर सवाल भी उठाए गए।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद छात्र आंदोलन को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हुए। हालांकि, प्रदर्शन से जुड़े विभिन्न दावों पर संबंधित पक्षों के बयान अलग-अलग रहे हैं।
कांग्रेस ने भी पेपर लीक के खिलाफ उठाई थी आवाज
पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस का छात्र संगठन एनएसयूआई भी शुरुआती विरोध प्रदर्शनों में शामिल रहा था। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, एनएसयूआई ने 12 मई को दिल्ली में प्रदर्शन किया था। यह विरोध उस घटनाक्रम के बाद हुआ था, जब पेपर लीक के आरोपों के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने नीट परीक्षा रद्द कर दी थी।
बाद में कांग्रेस ने छात्र समस्याओं को लेकर ‘छात्रों की गूंज’ अभियान शुरू किया। राहुल गांधी ने 17 जून को राजस्थान के कोटा से अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद अभियान देहरादून पहुंचा, जहां उन्होंने परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों से बातचीत की।
राहुल गांधी ने रोजगार और परीक्षा व्यवस्था पर कही थी बात
राहुल गांधी ने अभियान के दौरान कोटा, देहरादून और प्रयागराज जैसे शहरों में छात्रों से जुड़े अलग-अलग मुद्दे उठाए। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों, छात्रों के भविष्य और रोजगार के अवसरों से संबंधित चिंताओं को सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बनाया।
थरूर के ताजा बयान के बाद अब कांग्रेस के भीतर यह सवाल भी चर्चा में है कि छात्रों के मुद्दे उठाने के साथ-साथ उनके बीच प्रभावी राजनीतिक पहुंच कैसे बनाई जाए। उनके बयान को पार्टी के छात्र संपर्क अभियान के प्रभाव का आकलन करने और भविष्य की रणनीति पर विचार करने की अपील के रूप में देखा जा रहा है।