Smart Border – संवेदनशील सीमाओं पर बढ़ेगी तकनीकी निगरानी की व्यवस्था
Smart Border – देश की सीमा सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने व्यापक तकनीकी निगरानी तंत्र विकसित करने की तैयारी तेज कर दी है। योजना का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर घुसपैठ, तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले वर्षों में चरणबद्ध तरीके से कई महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों को आधुनिक निगरानी प्रणालियों से लैस किया जाएगा।

संवेदनशील क्षेत्रों को प्राथमिकता
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की इस पहल के तहत पहले चरण में कुछ अति संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की गई है। इन इलाकों में निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए आधुनिक उपकरणों और डिजिटल तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। योजना के शुरुआती चरण में चुनिंदा सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा ढांचे को उन्नत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
आधुनिक तकनीक से होगी निगरानी
नई व्यवस्था के तहत निगरानी प्रणाली में अत्याधुनिक तकनीकों को शामिल किया जाएगा। इसमें ड्रोन आधारित निगरानी, मोशन सेंसर और उन्नत सर्विलांस सिस्टम का उपयोग प्रमुख रूप से किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इन साधनों की मदद से सीमा क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों का तेजी से पता लगाया जा सकेगा और सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया क्षमता भी बेहतर होगी।
सीमावर्ती गांव भी होंगे योजना का हिस्सा
यह पहल केवल सीमा रेखा तक सीमित नहीं रहेगी। इसके दायरे में अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटे गांवों को भी शामिल किया गया है। पाकिस्तान, चीन, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और म्यांमार की सीमाओं के निकट स्थित क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं और सामरिक दृष्टि से आवश्यक विकास कार्यों पर भी जोर दिया जाएगा। स्थानीय प्रशासन और ग्रामीण स्तर के प्रतिनिधियों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्वदेशी तकनीक पर रहेगा फोकस
सीमा सुरक्षा परियोजना में स्वदेशी तकनीकी संसाधनों को प्राथमिकता देने की तैयारी है। विभिन्न अनुसंधान संस्थानों और रक्षा क्षेत्र से जुड़े संगठनों द्वारा विकसित ड्रोन और निगरानी उपकरणों का उपयोग किया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि घरेलू स्तर पर विकसित तकनीक न केवल सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करेगी, बल्कि आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को भी मजबूती देगी।
घुसपैठ और तस्करी पर रोक का लक्ष्य
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि कई सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध घुसपैठ, नशीले पदार्थों की तस्करी, हथियारों की आवाजाही और नकली मुद्रा जैसे मामलों ने लंबे समय से चुनौती पैदा की है। आधुनिक निगरानी प्रणाली का उद्देश्य इन गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाना और सुरक्षा तंत्र को अधिक सक्षम बनाना है।
चरणबद्ध तरीके से होगा विस्तार
सूत्रों के अनुसार, योजना को एक साथ लागू करने के बजाय चरणों में आगे बढ़ाया जाएगा। पहले सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा, उसके बाद अन्य महत्वपूर्ण सीमाई क्षेत्रों में तकनीकी ढांचे का विस्तार किया जाएगा। इस प्रक्रिया में सुरक्षा जरूरतों और भौगोलिक परिस्थितियों का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
सीमा अवसंरचना को भी मिलेगी मजबूती
सरकार सीमा क्षेत्रों में निगरानी के साथ-साथ भौतिक अवसंरचना को भी मजबूत करने पर काम कर रही है। कई स्थानों पर बाड़बंदी, सड़क संपर्क और सुरक्षा चौकियों से जुड़ी परियोजनाओं को गति देने की योजना है। अधिकारियों का मानना है कि तकनीक और आधारभूत संरचना के संयुक्त उपयोग से सीमा सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।