राष्ट्रीय

Pellet Gun – जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद पैलेट गन के इस्तेमाल पर बढ़ा विवाद

Pellet Gun– जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान भीड़ नियंत्रण के लिए कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस तेज हो गई है। कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने के बाद विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा है। शुक्रवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस मामले को उठाते हुए मीडिया के सामने एक ऐसे प्रदर्शनकारी को पेश किया, जिसके शरीर पर छर्रे लगने का दावा किया गया। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया है। दूसरी ओर, जानकारी के अनुसार दंगारोधी बल रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा इस उपकरण के इस्तेमाल की बात सामने आई है।

प्रदर्शन के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद

जंतर-मंतर की घटना के बाद विपक्ष ने भीड़ नियंत्रण के तौर-तरीकों पर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों को ऐसे हथियारों का सामना करना पड़ा, जिससे कई लोग घायल हुए। इस मुद्दे को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई गई है। वहीं, प्रशासन की ओर से अभी तक इस पूरे घटनाक्रम पर अलग-अलग एजेंसियों के स्तर पर स्पष्टीकरण सामने आ रहे हैं।

दिल्ली पुलिस का अलग पक्ष

दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उसके जवानों ने पैलेट गन का उपयोग नहीं किया। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उपलब्ध मानक प्रक्रियाओं का पालन किया गया। हालांकि, घटना में किस एजेंसी ने कौन-से उपकरण इस्तेमाल किए, इस पर चर्चा जारी है और संबंधित तथ्यों को लेकर विभिन्न पक्ष अपनी-अपनी बात रख रहे हैं।

पैलेट गन की क्षमता और उपयोग

सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पैलेट गन मूल रूप से भीड़ नियंत्रण के लिए विकसित की गई थी, लेकिन इसका इस्तेमाल बेहद सावधानी के साथ किया जाता है। यदि निर्धारित दूरी से कम दूरी पर इसका प्रयोग किया जाए या छर्रे चेहरे अथवा सीने जैसे संवेदनशील हिस्सों पर लगें, तो गंभीर चोट की आशंका रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि आंखों पर चोट लगने की स्थिति में स्थायी नुकसान का भी खतरा हो सकता है।

विदेश से खरीद के बाद देश में हुआ निर्माण

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 1992 में रैपिड एक्शन फोर्स की स्थापना के बाद शुरुआती दौर में पैलेट गन इजरायल और बेल्जियम से खरीदी गई थीं। बाद में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के सहयोग से इनका निर्माण देश में भी शुरू किया गया। बताया जाता है कि एक मल्टी बैरल लॉन्चर में छह से आठ शेल लगाए जा सकते हैं और प्रत्येक शेल से कई छोटे छर्रे निकलते हैं, जिनका उपयोग भीड़ को तितर-बितर करने के उद्देश्य से किया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रही है चर्चा

सीआरपीएफ के सेवानिवृत्त अतिरिक्त महानिदेशक एस.एस. संधू के अनुसार, पैलेट गन के उपयोग को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय से बहस होती रही है। उन्होंने कहा कि कई अंतरराष्ट्रीय समझौतों और मानवीय दृष्टिकोण से ऐसे हथियारों के इस्तेमाल पर गंभीर चिंताएं जताई गई हैं। हालांकि, विभिन्न देशों में इनके उपयोग से संबंधित नियम और नीतियां अलग-अलग हैं।

घटना पर बनी हुई है नजर

जंतर-मंतर की घटना के बाद पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। घायल प्रदर्शनकारियों के दावों, पुलिस के स्पष्टीकरण और सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका को लेकर स्थिति पर नजर बनी हुई है। यदि मामले में आगे कोई आधिकारिक जांच या विस्तृत रिपोर्ट सामने आती है, तो उससे इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

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