राष्ट्रीय

Passport – पासपोर्ट को लेकर सरकार ने फिर स्पष्ट की नागरिकता संबंधी स्थिति

Passport – केंद्र सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट को कभी भी नागरिकता का अंतिम और स्वतंत्र प्रमाण नहीं माना गया है। सरकार का कहना है कि यह कोई नई व्यवस्था नहीं है, बल्कि वर्षों से लागू कानूनी प्रावधानों के अनुरूप ही स्थिति बनी हुई है। इस संबंध में पासपोर्ट अधिनियम, 1967 और न्यायालय के पूर्व फैसलों का भी उल्लेख किया गया है।

कानून का हवाला देकर रखा पक्ष

सरकार ने अपने स्पष्टीकरण में बताया कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 के तहत केंद्र सरकार विशेष परिस्थितियों और जनहित को ध्यान में रखते हुए ऐसे व्यक्ति को भी पासपोर्ट जारी कर सकती है, जो भारतीय नागरिक न हो। इसी आधार पर यह स्पष्ट किया गया कि पासपोर्ट मुख्य रूप से यात्रा दस्तावेज है और अकेले इसके आधार पर नागरिकता तय नहीं की जाती। सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट के वर्ष 2013 के एक फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें इसी कानूनी स्थिति को स्वीकार किया गया था।

सोशल मीडिया पोस्ट के बाद बढ़ी चर्चा

यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया पर विदेश मंत्रालय के एक बयान का हवाला देते हुए सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा था कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो नागरिकता स्थापित करने के लिए कौन-से दस्तावेज मान्य होंगे। अपने संदेश में उन्होंने यह भी आशंका जताई थी कि इस स्थिति का असर मतदाता सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है।

सरकार ने बताया, नई नीति नहीं बनी

सरकार की ओर से कहा गया कि इस विषय में किसी प्रकार की नई नीति लागू नहीं की गई है। संबंधित कानूनी प्रावधान पहले से प्रभावी हैं और विदेश मंत्रालय ने केवल उसी स्थापित व्यवस्था को दोहराया है। सरकार का कहना है कि नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत किया जाता है, जबकि पासपोर्ट का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए वैध दस्तावेज उपलब्ध कराना है।

अमित मालवीय ने भी दी प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विदेश मंत्रालय ने केवल पहले से मौजूद कानूनी स्थिति को दोहराया है। उन्होंने अपने बयान में बॉम्बे हाईकोर्ट के 2013 के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि नागरिकता का निर्धारण विभिन्न वैध अभिलेखों और दस्तावेजों के आधार पर किया जाता है।

नागरिकता के लिए कई दस्तावेज हो सकते हैं आधार

सरकार और भाजपा की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण के अनुसार, नागरिकता स्थापित करने में जन्म प्रमाण पत्र, माता-पिता के नागरिकता संबंधी रिकॉर्ड, विद्यालय के अभिलेख, मतदाता सूची में नाम, सरकारी सेवा से जुड़े दस्तावेज, भूमि एवं निवास संबंधी रिकॉर्ड और अन्य वैध प्रमाणों को परिस्थितियों के अनुसार देखा जा सकता है। सरकार ने दोहराया कि पासपोर्ट एक महत्वपूर्ण आधिकारिक दस्तावेज जरूर है, लेकिन उसे अकेले नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता।

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