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MoneyLaundering – सीमा पार ड्रग्स नेटवर्क मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई

MoneyLaundering – प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सोमवार को कई राज्यों में एक साथ तलाशी अभियान चलाया। अधिकारियों के अनुसार, मिजोरम-म्यांमार सीमा क्षेत्र, त्रिपुरा-बांग्लादेश सीमा और पश्चिम बंगाल में कुल चार स्थानों पर कार्रवाई की गई। यह अभियान धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों के तहत शुरू किया गया और मामले से जुड़े दस्तावेजों तथा वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है।

सुबह से शुरू हुई समन्वित कार्रवाई

जानकारी के मुताबिक, ईडी के आइजोल सब-जोनल कार्यालय की विभिन्न टीमों ने सोमवार सुबह एक साथ कई ठिकानों पर पहुंचकर तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य कथित अवैध वित्तीय गतिविधियों और उनसे जुड़े नेटवर्क की जांच करना है। मामले से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, बैंकिंग दस्तावेज और अन्य साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं।

नारकोटिक्स जब्ती से जुड़ा है मामला

यह जांच एक ऐसे प्रकरण से जुड़ी है जिसमें नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने अगस्त 2025 में त्रिपुरा में बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित मादक पदार्थ जब्त किए थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, उस समय 49.101 किलोग्राम मेथामफेटामाइन और 40 ग्राम हेरोइन बरामद की गई थी। इसके बाद वित्तीय गतिविधियों और कथित धन शोधन के पहलुओं की जांच शुरू की गई।

सीमा क्षेत्रों के इस्तेमाल की आशंका

जांच में सामने आया है कि मादक पदार्थों की तस्करी के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे कुछ मार्गों का उपयोग किए जाने की आशंका है। अधिकारियों के अनुसार, म्यांमार से मिजोरम के चंफाई और जोखावथर क्षेत्रों के रास्ते अवैध खेप भारत में लाई जाती थी। बाद में इसे अन्य राज्यों तक पहुंचाने की कथित व्यवस्था की जाती थी। हालांकि एजेंसियां अभी भी पूरे नेटवर्क की संरचना और संचालन पद्धति की विस्तृत जांच कर रही हैं।

वित्तीय लेन-देन की पड़ताल जारी

ईडी का मानना है कि अवैध गतिविधियों से अर्जित धन को विभिन्न बैंक खातों और व्यावसायिक संस्थाओं के माध्यम से छिपाने का प्रयास किया गया हो सकता है। इसी कड़ी में कई वित्तीय दस्तावेजों और संदिग्ध लेन-देन की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि धन के स्रोत, उसके प्रवाह और उससे जुड़े व्यक्तियों की भूमिका को समझने के लिए विस्तृत वित्तीय विश्लेषण किया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जांच पर फोकस

प्रारंभिक जांच में एक संगठित सीमा-पार तस्करी नेटवर्क की संभावना सामने आई है। एजेंसियों का कहना है कि यह नेटवर्क भारत-म्यांमार और भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्रों का इस्तेमाल कर सकता था। इसी कारण जांच केवल मादक पदार्थों की तस्करी तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे जुड़े आर्थिक और वित्तीय पहलुओं को भी विस्तार से खंगाला जा रहा है।

142 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध संपत्ति की पहचान

अधिकारियों के मुताबिक, अब तक की जांच में 142 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अपराध से अर्जित संपत्ति की पहचान की गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह राशि किन माध्यमों से संचालित हुई और इसमें किन व्यक्तियों या संस्थाओं की भूमिका रही। मामले में आगे और पूछताछ तथा दस्तावेजी जांच की संभावना भी जताई जा रही है।

जांच जारी, आगे हो सकते हैं नए खुलासे

ईडी ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई अभी जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और सभी तथ्यों की पुष्टि साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। एजेंसियां जुटाए गए दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की समीक्षा कर रही हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में नए तथ्य सामने आ सकते हैं।

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