MaharashtraPolitics – पंकजा और धनंजय मुंडे के बयानों से सियासी अटकलें तेज
MaharashtraPolitics – महाराष्ट्र की राजनीति में मंगलवार को उस समय नई चर्चा शुरू हो गई, जब भाजपा नेता एवं राज्य सरकार में मंत्री पंकजा मुंडे और उनके चचेरे भाई, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक धनंजय मुंडे के राजनीतिक भविष्य को लेकर दिए गए बयान सुर्खियों में आ गए। हालांकि, दोनों नेताओं ने बाद में स्पष्ट किया कि उनका तत्काल राजनीति से दूरी बनाने या संन्यास लेने का कोई निर्णय नहीं है।

पंकजा मुंडे ने साझा किया अपना अनुभव
एक अगस्त को बीड जिले के परली में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पंकजा मुंडे ने क्षेत्र की खराब सड़कों और प्रशासनिक व्यवस्था पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि लगातार एक ही मार्ग से गुजरते हुए जब उन्हें हालात में कोई बदलाव नहीं दिखा, तो एक पल के लिए उनके मन में राजनीति छोड़ने का विचार आया। उन्होंने बताया कि इस भावना का जिक्र उन्होंने अपने निजी सहायक से भी किया था।
लोगों के भरोसे ने बदला फैसला
अपने बयान को स्पष्ट करते हुए पंकजा मुंडे ने कहा कि आम लोगों का विश्वास और उनके चेहरे पर दिखने वाली उम्मीद ने उन्हें दोबारा काम करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि जब तक लोगों की अपेक्षाएं उनसे जुड़ी हैं, तब तक उनकी जिम्मेदारी भी बनी हुई है। भाजपा के दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा ने यह भी कहा कि यदि कभी उन्हें लगे कि राजनीति उनके मूल विचारों और सिद्धांतों के अनुरूप नहीं रह गई है, तो वह सम्मानपूर्वक अलग होने का निर्णय ले सकती हैं।
धनंजय मुंडे ने भी जताई चिंता
उसी दिन माजलगांव में आयोजित एक कार्यक्रम में एनसीपी विधायक धनंजय मुंडे ने भी मौजूदा राजनीतिक माहौल पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि जातीय आधार पर बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा चिंता का विषय है और कई बार ऐसे हालात में राजनीति में बने रहने को लेकर सवाल मन में आते हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि वह सामाजिक न्याय और समानता के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध हैं और इन्हीं सिद्धांतों के साथ सार्वजनिक जीवन में आगे भी काम करते रहेंगे।
राजनीतिक पृष्ठभूमि भी बनी चर्चा का कारण
पंकजा मुंडे का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में बीड सीट से हार के बाद उन्हें भाजपा ने विधान परिषद के लिए मनोनीत किया है। वहीं धनंजय मुंडे भी हाल के महीनों में अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने में जुटे हैं, जिससे उनके बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
इस्तीफे के बाद फिर सक्रिय हुए धनंजय
धनंजय मुंडे ने मार्च 2025 में राज्य मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया था। उस समय संतोष देशमुख हत्याकांड से जुड़े राजनीतिक विवाद और उनके करीबी सहयोगी वाल्मिक कराड का नाम मामले में सामने आने के बाद उन पर दबाव बढ़ा था। अब उनके हालिया बयान को भी इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया है कि उनके वक्तव्यों का अर्थ राजनीति से तत्काल संन्यास नहीं है।