राष्ट्रीय

LabourCode – नए श्रम कानूनों को लेकर कांग्रेस ने सरकार को घेरा

LabourCode – केंद्र सरकार द्वारा चारों श्रम संहिताओं के अंतिम नियम लागू किए जाने के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने सोमवार को सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि नए श्रम कानून मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करने वाले हैं। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि इन नियमों के लागू होने से श्रमिकों के हित प्रभावित होंगे और रोजगार व्यवस्था में अस्थिरता बढ़ सकती है।

सरकार की ओर से हाल ही में चारों लेबर कोड से जुड़े अंतिम नियमों को अधिसूचित किया गया है। इसके बाद से विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग रहा है।

कांग्रेस ने समय को लेकर उठाए सवाल

मल्लिकार्जुन खरगे ने बयान जारी कर कहा कि केंद्र सरकार ने विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद श्रम संहिताओं को लागू करने का फैसला लिया। उनके अनुसार, 8 और 9 मई को जारी अधिसूचनाओं के जरिए इन नियमों को अंतिम रूप दिया गया।

कांग्रेस का आरोप है कि इन कानूनों के लागू होने से “हायर एंड फायर” जैसी नीतियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थायी रोजगार की जगह संविदा आधारित नियुक्तियों में वृद्धि हो सकती है। पार्टी का कहना है कि इससे श्रमिक संगठनों की भूमिका भी सीमित हो सकती है।

श्रमिक अधिकारों पर असर का दावा

कांग्रेस ने यह भी कहा कि इन श्रम संहिताओं को तैयार करते समय व्यापक परामर्श प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। खरगे ने आरोप लगाया कि 2015 के बाद भारतीय श्रम सम्मेलन आयोजित नहीं किया गया, जबकि ऐसे बड़े बदलावों से पहले सभी पक्षों से चर्चा जरूरी थी।

पार्टी का दावा है कि नए नियम उद्योग जगत को अधिक लचीलापन देते हैं, लेकिन इससे श्रमिकों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर चिंता बढ़ी है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकार को मजदूर संगठनों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत संवाद करना चाहिए था।

कांग्रेस ने अपने श्रमिक एजेंडे का किया जिक्र

कांग्रेस ने इस दौरान श्रमिकों को लेकर अपनी प्राथमिकताओं को भी सामने रखा। पार्टी ने मनरेगा के विस्तार, राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन बढ़ाने और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा मजबूत करने की बात दोहराई।

पार्टी ने स्वास्थ्य सुविधाओं, बीमा सुरक्षा और सरकारी कार्यों में संविदा व्यवस्था को सीमित करने जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। कांग्रेस का कहना है कि वह श्रमिकों के हितों से जुड़े मुद्दों को आगे भी राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर उठाती रहेगी।

सरकार ने श्रम कानूनों को बताया आधुनिक व्यवस्था

केंद्र सरकार की ओर से कहा गया है कि चारों श्रम संहिताओं का उद्देश्य देश के पुराने श्रम कानूनों को सरल और आधुनिक बनाना है। इन संहिताओं के जरिए 29 अलग-अलग श्रम कानूनों को एकीकृत ढांचे में शामिल किया गया है।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, नए नियमों से न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे श्रमिकों और उद्योगों दोनों को लाभ मिलेगा तथा रोजगार क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी।

नवंबर 2025 से लागू हुई नई व्यवस्था

सरकारी अधिसूचना के अनुसार, वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थितियां संहिता 2020 को लागू करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।

अधिकारियों ने बताया कि इन नियमों के लागू होने के साथ देश में श्रम कानूनों का नया ढांचा प्रभावी हो गया है। सरकार इसे श्रम सुधारों की दिशा में बड़ा कदम मान रही है, जबकि विपक्ष और कई श्रमिक संगठन इसके प्रभाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

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