राष्ट्रीय

IranCrisis – वैश्विक तनाव के बीच अर्थव्यवस्था बचाने को 20 सूत्रीय सुझाव

IranCrisis – पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान से जुड़े हालात, का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर भी महसूस किया जा रहा है। इसी पृष्ठभूमि में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने स्थिति को संभालने के लिए एक विस्तृत 20 सूत्रीय कार्ययोजना पेश की है। इस एजेंडे का उद्देश्य उद्योग, वित्तीय प्रणाली और रोजगार से जुड़े क्षेत्रों को संभावित झटकों से बचाना है, ताकि आर्थिक गतिविधियां संतुलित बनी रहें।

एमएसएमई के लिए राहत उपायों पर जोर

सीआईआई ने खास तौर पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाने की जरूरत बताई है। सुझाव दिया गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक एक विशेष पुनर्वित्त सुविधा शुरू करे, जिससे बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों को सस्ती दरों पर कर्ज उपलब्ध कराने में मदद मिले। इससे उत्पादन और रोजगार से जुड़े क्षेत्रों को राहत मिल सकती है। इसके अलावा, तीन महीने तक ऋण भुगतान में छूट जैसे उपायों पर भी विचार करने की बात कही गई है, ताकि छोटे कारोबारियों को तत्काल राहत मिल सके।

आपातकालीन ऋण योजना की सिफारिश

उद्योग संगठन ने यह भी सुझाव दिया है कि केंद्र सरकार कोविड काल में लागू की गई आपातकालीन क्रेडिट योजना की तर्ज पर एक नई योजना शुरू करे। इस प्रस्तावित योजना के तहत एमएसएमई, निर्यातक और ऊर्जा पर निर्भर उद्योगों को सरकारी गारंटी के साथ कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे बाजार में नकदी की कमी को दूर करने और उत्पादन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

विदेशी निवेश बनाए रखने के उपाय

सीआईआई ने विदेशी निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए भी कुछ कदम सुझाए हैं। इसमें दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर में अस्थायी छूट देने का प्रस्ताव शामिल है। इसके तहत निवेश की न्यूनतम अवधि को बढ़ाकर तीन वर्ष करने का सुझाव दिया गया है। उद्योग जगत का मानना है कि इससे स्थिर निवेश को बढ़ावा मिलेगा और अनिश्चित परिस्थितियों में पूंजी के पलायन को रोका जा सकेगा।

बैंकों और उद्योगों के लिए अतिरिक्त सहूलियत

रिपोर्ट में प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के नियमों में लचीलापन लाने की भी बात कही गई है, ताकि बैंक जरूरत के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों को सहायता दे सकें। इसके अलावा बिजली शुल्क में अस्थायी राहत, नकद ऋण सीमा में बढ़ोतरी और लोन प्रोसेसिंग शुल्क में छूट जैसे सुझाव भी दिए गए हैं। साथ ही, लंबित जीएसटी रिफंड और अन्य दावों को तेजी से निपटाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, जिससे उद्योगों की नकदी स्थिति मजबूत हो सके।

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर अपडेट

इस बीच, पश्चिमी फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। जानकारी के अनुसार, वहां मौजूद 17 भारतीय जहाजों और करीब 460 नाविकों की स्थिति सुरक्षित बताई गई है। इसके अलावा, बड़ी संख्या में भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।

वापसी और यातायात व्यवस्था में सुधार

हाल के दिनों में 1,400 से अधिक नाविकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की गई है, जबकि ईरान से लौटे 345 भारतीय मछुआरे चेन्नई पहुंच चुके हैं। उड़ान सेवाएं भी धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं और अब तक लाखों यात्री भारत लौट चुके हैं। यह संकेत देता है कि सरकार और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और आवश्यक कदम उठा रही हैं।

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