EyeHealth – आंख फड़कने के पीछे क्या हैं असली कारण, जानिए विशेषज्ञों की राय…
EyeHealth – कई लोग आंख फड़कने को शुभ या अशुभ संकेत मानते हैं, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार इसका संबंध किसी मान्यता से नहीं बल्कि शरीर की सामान्य शारीरिक स्थिति या स्वास्थ्य संबंधी कारणों से हो सकता है। अधिकतर मामलों में यह समस्या कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो जाती है। हालांकि यदि फड़कन लंबे समय तक बनी रहे या इसके साथ अन्य परेशानी भी महसूस हो, तो नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी माना जाता है।

पलक की मांसपेशियों में होती है अनैच्छिक हलचल
डॉक्टरों के अनुसार आंख फड़कना दरअसल पलकों की मांसपेशियों में होने वाला हल्का और अनियंत्रित संकुचन होता है। यह कुछ सेकंड या मिनट तक रह सकता है, जबकि कुछ लोगों में बीच-बीच में कई दिनों तक भी महसूस हो सकता है। सामान्य परिस्थितियों में यह गंभीर समस्या नहीं होती, लेकिन बार-बार होने पर इसके कारणों की जांच आवश्यक हो सकती है।
तनाव और नींद की कमी हो सकते हैं प्रमुख कारण
मानसिक तनाव आंख फड़कने की सबसे सामान्य वजहों में से एक माना जाता है। लगातार काम का दबाव, चिंता या मानसिक थकान आंखों की मांसपेशियों को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा पर्याप्त नींद न लेने से भी आंखों को पूरा आराम नहीं मिल पाता, जिससे पलकों में फड़कन शुरू हो सकती है। नियमित और पर्याप्त नींद लेने से इस समस्या में राहत मिल सकती है।
स्क्रीन टाइम और कैफीन का भी पड़ सकता है असर
मोबाइल, कंप्यूटर और टीवी के सामने लंबे समय तक रहने से आंखों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे आंखों में सूखापन, थकान और पलक फड़कने जैसी समस्या हो सकती है। वहीं कुछ लोगों में अत्यधिक चाय, कॉफी या एनर्जी ड्रिंक का सेवन भी मांसपेशियों की गतिविधि बढ़ाकर इस परेशानी को बढ़ा सकता है। ऐसे में स्क्रीन के बीच-बीच में ब्रेक लेना और कैफीन का सेवन सीमित रखना फायदेमंद हो सकता है।
आंखों का सूखापन और पोषण की कमी
बढ़ती उम्र, अधिक स्क्रीन टाइम या कुछ दवाओं के कारण आंखों की नमी कम हो सकती है, जिससे पलक फड़कने की शिकायत बढ़ सकती है। कुछ मामलों में मैग्नीशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्वों की कमी भी मांसपेशियों के सामान्य कामकाज को प्रभावित कर सकती है। हालांकि हर व्यक्ति में यही कारण हो, ऐसा जरूरी नहीं है।
राहत के लिए अपनाएं ये आसान उपाय
विशेषज्ञों की सलाह है कि रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद लें, स्क्रीन उपयोग के दौरान 20-20-20 नियम अपनाएं और आंखों को नियमित अंतराल पर आराम दें। तनाव कम करने के लिए योग या ध्यान का सहारा लिया जा सकता है। पर्याप्त पानी पीना, संतुलित आहार लेना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से आई ड्रॉप का उपयोग भी लाभदायक हो सकता है। यदि आंख की फड़कन एक सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे, पलक पूरी तरह बंद होने लगे, आंख में लालिमा, सूजन, दर्द या धुंधला दिखाई देने जैसी समस्या हो, तो बिना देरी किए नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।