Geopolitics – चीन नीति और ग्रेट निकोबार परियोजना पर कांग्रेस ने किया हमला
Geopolitics – कांग्रेस ने केंद्र सरकार की चीन नीति और ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर बुधवार को तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार चीन के प्रति नरम रुख अपना रही है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देने से बच रही है। उन्होंने कहा कि सरकार आलोचनाओं को दबाने के लिए विरोध करने वालों को गलत तरीके से चीन समर्थक बताने की कोशिश कर रही है।

सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में जयराम रमेश ने कहा कि देश के सामने चीन से जुड़ी आर्थिक और सामरिक चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन सरकार इन मुद्दों पर गंभीरता से कार्रवाई करती नहीं दिख रही। उन्होंने विशेष रूप से लद्दाख की स्थिति, व्यापार घाटे और ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर सवाल उठाए।
चीन नीति पर सरकार को घेरा
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार चीन के साथ सीमा विवाद और अन्य मुद्दों पर पारदर्शिता नहीं बरत रही है। उन्होंने वर्ष 2020 की उस टिप्पणी का उल्लेख किया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भारतीय सीमा में कोई घुसपैठ नहीं हुई। रमेश के अनुसार, इस बयान से उन सैनिकों के बलिदान को ठेस पहुंची जिन्होंने लद्दाख में संघर्ष के दौरान अपनी जान गंवाई थी।
उन्होंने यह भी दावा किया कि चीन के साथ हुई बातचीत के बाद भारत ने कुछ इलाकों में पारंपरिक गश्त और चराई से जुड़े अधिकार खो दिए हैं। रमेश ने कहा कि इसका असर सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर भी पड़ा है। कांग्रेस का कहना है कि सीमा सुरक्षा और कूटनीतिक रणनीति पर सरकार को संसद और जनता के सामने स्पष्ट स्थिति रखनी चाहिए।
व्यापार घाटे को लेकर भी उठाए सवाल
जयराम रमेश ने चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर भी सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना की। उनके अनुसार, हाल के वर्षों में चीन से आयात लगातार बढ़ा है, जिससे भारतीय उद्योगों और छोटे कारोबारियों पर दबाव पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि 2025-26 के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार आत्मनिर्भरता की बात तो करती है, लेकिन व्यवहार में चीन पर निर्भरता कम करने के लिए ठोस कदम नजर नहीं आते। उन्होंने छोटे उद्योगों और घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया। रमेश के मुताबिक, चीन से जुड़े आर्थिक मुद्दे केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका असर राष्ट्रीय रणनीति और रोजगार पर भी पड़ता है।
ग्रेट निकोबार परियोजना पर पर्यावरणीय चिंता
ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार के रुख पर सवाल उठाए। जयराम रमेश ने कहा कि इस परियोजना से पर्यावरण और स्थानीय पारिस्थितिकी पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि परियोजना को विकास के नाम पर आगे बढ़ाया जा रहा है, जबकि इसके संभावित पर्यावरणीय परिणामों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई है।
रमेश ने कहा कि प्रस्तावित बंदरगाह और अन्य ढांचागत निर्माण मुख्य रूप से व्यावसायिक गतिविधियों के लिए हैं और इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर पेश किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्यावरणीय चिंताओं को नजरअंदाज कर परियोजना को तेजी से मंजूरी देने की कोशिश की जा रही है।
रणनीतिक जरूरत और राजनीतिक बहस
कांग्रेस का कहना है कि अंडमान-निकोबार क्षेत्र में सामरिक दृष्टि से जरूरी सैन्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। पार्टी ने आईएनएस बाज और अंडमान-निकोबार कमांड के विस्तार से जुड़े सुझावों का भी उल्लेख किया।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार पहले ही यह कह चुकी है कि ग्रेट निकोबार परियोजना देश की रणनीतिक क्षमता और समुद्री व्यापार नेटवर्क को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ऐसे में यह मुद्दा अब केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, विकास और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का बड़ा विषय बनता जा रहा है।