Election – संजय राउत का भाजपा पर दलबदल को लेकर तीखा हमला, सत्ता और राजनीतिक भविष्य पर साधा निशाना
Election – शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी पर विपक्षी दलों को कमजोर करने के प्रयास का आरोप लगाया। मुंबई में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में विपक्षी नेताओं और दलों को विभाजित करने की कोशिशें लगातार बढ़ रही हैं। राउत का दावा था कि इस तरह की राजनीति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित संकेत नहीं है।

विपक्षी दलों को कमजोर करने का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए संजय राउत ने कहा कि भाजपा का पूरा ध्यान अन्य राजनीतिक दलों में टूट पैदा करने पर केंद्रित दिखाई देता है। उनके अनुसार, विभिन्न राज्यों में सामने आए घटनाक्रम इसी दिशा की ओर इशारा करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों को कमजोर करने की रणनीति लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा के बजाय दलों के संगठनात्मक ढांचे को प्रभावित करने का प्रयास है।
सत्ता जाने पर भाजपा के भविष्य को लेकर दावा
राउत ने भाजपा के भविष्य को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि जिस दिन पार्टी केंद्र की सत्ता से बाहर होगी, उसके भीतर भी व्यापक राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता परिवर्तन की स्थिति में केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली को लेकर भी अलग परिस्थितियां बन सकती हैं। हालांकि, यह उनके व्यक्तिगत राजनीतिक बयान हैं और इन पर भाजपा की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सचिन अहीर पर भी साधा निशाना
इससे पहले संजय राउत ने शिवसेना से जुड़े रहे नेता और विधान परिषद सदस्य सचिन अहीर को लेकर भी नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा कि पार्टी ने अहीर को समय-समय पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां और पद दिए, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने संगठन का साथ छोड़ दिया। राउत के अनुसार, पार्टी ने उन्हें एमएलसी, उपनेता और कामगार सेना के कार्यकारी अध्यक्ष जैसे अहम दायित्व सौंपे थे।
वफादारी और राजनीतिक मूल्यों का उठाया मुद्दा
संजय राउत ने कहा कि राजनीति केवल पद और अवसर का माध्यम नहीं है, बल्कि इसमें निष्ठा और भरोसे का भी महत्व होता है। उन्होंने दावा किया कि सचिन अहीर का आदित्य ठाकरे के साथ लंबे समय तक करीबी राजनीतिक संबंध रहा है, इसलिए दूरी या संवाद की कमी का तर्क उचित नहीं माना जा सकता। राउत ने कहा कि मौजूदा राजनीति में व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा बढ़ने से वफादारी और सिद्धांतों जैसे मूल्यों को नुकसान पहुंच रहा है। उनके इन बयानों ने राज्य की राजनीति में एक बार फिर दलबदल और राजनीतिक निष्ठा को लेकर चर्चा तेज कर दी है।