CourtCase – धार भोजशाला विवाद में हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, सुनवाई में उठे कई सवाल
CourtCase – धार की ऐतिहासिक भोजशाला से जुड़े विवाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के हालिया फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। मंगलवार को इस मामले पर भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने प्रारंभिक सुनवाई की। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी ने अदालत के समक्ष अपनी आपत्तियां रखते हुए कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें सर्वोच्च न्यायालय में प्रभावी ढंग से अपील करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। उन्होंने इस मुद्दे को न्यायिक प्रक्रिया और सभी पक्षों को समान अवसर दिए जाने के सिद्धांत से भी जोड़ा।

सुप्रीम कोर्ट में क्या रखा गया पक्ष
सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा कि वर्ष 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की ओर से एक व्यवस्था लागू की गई थी, जिसके तहत शुक्रवार को नमाज और मंगलवार को पूजा की अनुमति दी गई थी। उनका कहना था कि वर्तमान स्थिति में मुस्लिम समुदाय को पूरी तरह बाहर कर दिया गया है, जिसे उन्होंने अनुचित बताया। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि मामले की सुनवाई के दौरान सभी पक्षों के अधिकारों और पहले से लागू व्यवस्थाओं को भी ध्यान में रखा जाए।
ASI रिपोर्ट पर भी उठाए गए सवाल
मुस्लिम पक्ष ने अदालत के समक्ष यह भी दलील दी कि ASI की रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारियों या विशेषज्ञों से किसी प्रकार की जिरह या पूछताछ नहीं की गई। उनके अनुसार, रिपोर्ट के आधार पर महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आए, लेकिन उसकी प्रक्रिया की न्यायिक जांच का अवसर नहीं मिला। इस बिंदु को लेकर उन्होंने रिपोर्ट की विश्वसनीयता और उससे जुड़े तथ्यों की निष्पक्ष समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।
तीन सदस्यीय पीठ ने की सुनवाई
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने की, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस जे.वी. मोहना भी शामिल रहे। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर प्रारंभिक रूप से विचार किया। फिलहाल, सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की मेरिट पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के तहत इस विवाद पर सुनवाई जारी रहेगी।
ऐतिहासिक और कानूनी महत्व का मामला
धार भोजशाला विवाद लंबे समय से कानूनी और ऐतिहासिक चर्चा का विषय रहा है। इस मामले में धार्मिक परंपराओं, ऐतिहासिक दावों और कानूनी अधिकारों से जुड़े कई पहलू शामिल हैं। यही वजह है कि इस पर आने वाले प्रत्येक न्यायिक फैसले पर विभिन्न पक्षों की नजर बनी रहती है। अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल चुनौती के बाद यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। आगे की सुनवाई में अदालत के समक्ष रखे जाने वाले तर्क और उपलब्ध साक्ष्य इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।