Jagannath – रथ यात्रा की तिथि को लेकर पुरी मंदिर समिति ने ISKCON के दावे का किया खंडन
Jagannath- भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के आयोजन की निर्धारित तिथियों को लेकर पुरी श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) और ISKCON के बीच मतभेद एक बार फिर सामने आ गए हैं। मंदिर प्रशासन से जुड़ी एक समिति ने ISKCON के उस दावे को अस्वीकार कर दिया है, जिसमें विदेशों में सुविधानुसार अलग-अलग तिथियों पर रथ यात्रा आयोजित करने को शास्त्रसम्मत बताया गया था। समिति का कहना है कि इस तरह के दावे से श्रद्धालुओं के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

विदेशों में रथ यात्रा के आयोजन को लेकर विवाद
यह विवाद भारत से बाहर भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा और अन्य धार्मिक उत्सवों के आयोजन की तिथियों को लेकर चल रहा है। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने जारी बयान में कहा कि 12 जुलाई 2026 को ISKCON के राष्ट्रीय संचार कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में किए गए कुछ दावे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। प्रशासन का कहना है कि इन बयानों से पारंपरिक धार्मिक व्यवस्था को लेकर गलत संदेश जाने की आशंका है।
मंदिर प्रशासन ने दावों को बताया तथ्यहीन
SJTA ने अपने बयान में कहा कि यह कहना सही नहीं है कि वर्ष के किसी भी समय आयोजित की जाने वाली रथ यात्राएं पूरी तरह शास्त्रों के अनुरूप हैं। प्रशासन का मत है कि भगवान जगन्नाथ से जुड़े प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों और पर्वों की निर्धारित तिथियां परंपरा तथा मान्य धार्मिक ग्रंथों के आधार पर तय होती हैं। इसलिए इन आयोजनों के संबंध में शास्त्रीय व्याख्या को लेकर सावधानी बरतना आवश्यक है।
ISKCON की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया नहीं
इस मामले में जब समाचार एजेंसी पीटीआई ने ISKCON के राष्ट्रीय प्रवक्ता और संचार निदेशक युधिष्ठिर गोविंदा दास से संपर्क किया, तो उन्होंने तत्काल कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार किया। उनका कहना था कि मंदिर प्रशासन का पूरा बयान देखे बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। उन्होंने संकेत दिया कि आधिकारिक दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद ही संगठन अपना पक्ष स्पष्ट करेगा।
पहले भी हो चुकी है दोनों पक्षों की बैठक
मंदिर प्रशासन के अनुसार, 20 मार्च 2025 को भुवनेश्वर में SJTA और ISKCON के विद्वानों के बीच इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई थी। बैठक के दौरान ISKCON के प्रतिनिधियों ने विभिन्न धार्मिक संदर्भों के आधार पर विदेशों में अलग-अलग तिथियों पर रथ यात्रा आयोजित किए जाने का पक्ष रखा था। वहीं, मंदिर प्रशासन से जुड़े विद्वानों ने पुराणों और अन्य मान्य धार्मिक ग्रंथों का हवाला देते हुए इस तर्क से असहमति जताई थी।
परंपराओं के पालन पर दिया गया जोर
मंदिर प्रशासन का कहना है कि भगवान जगन्नाथ से जुड़े धार्मिक आयोजनों की परंपरा सदियों पुरानी है और उनके आयोजन का समय स्थापित धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप निर्धारित किया जाता है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस विषय में केवल आधिकारिक और प्रमाणिक जानकारी पर भरोसा करें। फिलहाल इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं और आगे की स्थिति पर धार्मिक समुदाय की भी नजर बनी हुई है।