Nutrition – पेट खराब होने पर मूंग दाल क्यों मानी जाती है बेहतर विकल्प…
Nutrition- पेट से जुड़ी समस्याएं होने पर खान-पान में बदलाव करना सबसे जरूरी माना जाता है। दस्त, अपच, गैस या पेट दर्द जैसी स्थितियों में डॉक्टर और पोषण विशेषज्ञ अक्सर हल्का भोजन लेने की सलाह देते हैं। ऐसे समय में मूंग दाल का नाम सबसे पहले लिया जाता है, क्योंकि यह आसानी से पचने वाली दालों में शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह शरीर को आवश्यक पोषण देने के साथ पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव भी नहीं डालती। हालांकि, यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहें या तेज बुखार, लगातार उल्टी या मल में खून जैसी शिकायत हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

हल्की होने के कारण पाचन पर नहीं पड़ता अतिरिक्त दबाव
मूंग दाल को अन्य कई दालों की तुलना में हल्का माना जाता है। इसमें मौजूद प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट अपेक्षाकृत आसानी से पच जाते हैं। जब पाचन तंत्र पहले से कमजोर हो, तब अधिक तेल, मसाले या भारी भोजन समस्या को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में सादी मूंग दाल या उसकी खिचड़ी पेट को आराम देने वाला विकल्प मानी जाती है। इसी वजह से बीमारी के दौरान इसे नियमित आहार में शामिल करने की सलाह दी जाती है।
शरीर को मिलता है जरूरी पोषण
पेट खराब होने पर बार-बार दस्त या उल्टी की वजह से शरीर में कमजोरी महसूस हो सकती है। इस दौरान शरीर को ऊर्जा और पोषक तत्वों की जरूरत होती है। मूंग दाल पौधों से मिलने वाले प्रोटीन का अच्छा स्रोत है। इसके अलावा इसमें फोलेट, आयरन, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं, जो शरीर की रिकवरी में सहायक माने जाते हैं। कम मसालों में तैयार की गई मूंग दाल पोषण और पाचन, दोनों दृष्टि से लाभकारी मानी जाती है।
खिचड़ी और पतली दाल रहती है उपयुक्त
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पेट की परेशानी के दौरान मूंग दाल को हल्के रूप में खाना अधिक उपयुक्त रहता है। सादी खिचड़ी, पतली दाल या उबले चावल के साथ मूंग दाल का सेवन आसानी से पच जाता है। इनमें अधिक तेल और तीखे मसाले नहीं होने से पाचन तंत्र पर अतिरिक्त भार नहीं पड़ता। यही कारण है कि अस्पतालों और घरों में रिकवरी डाइट के रूप में भी इसे प्राथमिकता दी जाती है।
गैस बनने की संभावना रहती है कम
राजमा, छोले, उड़द और चने जैसी कुछ दालें कई लोगों में गैस या पेट फूलने की समस्या बढ़ा सकती हैं। इसके मुकाबले मूंग दाल अपेक्षाकृत हल्की मानी जाती है और इसे अच्छी तरह पकाकर खाने पर गैस बनने की संभावना कम रहती है। इसलिए अपच या पेट खराब होने की स्थिति में इसे बेहतर विकल्प माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति को मूंग दाल खाने के बाद भी असहजता महसूस हो, तो डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन से सलाह लेना उचित रहेगा।
सेवन के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
पेट खराब होने पर मूंग दाल बनाते समय कम तेल और हल्के मसालों का ही उपयोग करना चाहिए। इसके साथ पर्याप्त मात्रा में पानी और जरूरत पड़ने पर ORS का सेवन भी शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में मदद कर सकता है। तला-भुना और बाहर का भोजन कुछ समय के लिए टालना बेहतर माना जाता है। यदि दस्त, उल्टी या पेट दर्द लगातार बना रहे या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो घरेलू उपायों के बजाय डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।