CapacityBuilding – तेज हुई सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया
CapacityBuilding – देशभर में सरकारी कर्मचारियों के प्रशिक्षण तंत्र को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने के लिए व्यापक स्तर पर सुधार कार्य जारी हैं। क्षमता निर्माण आयोग (सीबीसी) की अध्यक्ष एस. राधा चौहान ने बताया कि 700 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों को एक साझा ढांचे से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसका उद्देश्य लोक सेवकों के कौशल विकास को बेहतर बनाना और प्रशिक्षण संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है।

एक साक्षात्कार में चौहान ने कहा कि आयोग ने केंद्र सरकार के 90 से अधिक मंत्रालयों और विभागों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिकाओं का विस्तृत अध्ययन किया है। इसके आधार पर विभिन्न पदों की आवश्यकताओं के अनुरूप क्षमता विकास योजनाएं तैयार की गई हैं, ताकि प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिक व्यावहारिक और उपयोगी बन सकें।
प्रशिक्षण संस्थानों की राष्ट्रीय स्तर पर मैपिंग
सीबीसी ने देशभर में संचालित 700 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों की पहचान और मैपिंग का कार्य पूरा किया है। इसी प्रक्रिया के तहत यूनिफाइड न्यू-एज नेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूशंस (यूएनएनएटीआई) पहल शुरू की गई है। इस पहल का लक्ष्य प्रशिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाना, आधुनिक संसाधनों को साझा करना और गुणवत्ता सुधार के लिए एक मजबूत नेटवर्क तैयार करना है।
चौहान के अनुसार, पहले यह स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं थी कि देश में इतनी बड़ी संख्या में प्रशिक्षण संस्थान कार्यरत हैं। अधिकांश संस्थान स्वतंत्र रूप से काम कर रहे थे, जिससे उनके अनुभव और संसाधनों का व्यापक लाभ नहीं मिल पा रहा था।
साझा मंच पर जुड़ेंगे संस्थान
यूएनएनएटीआई के माध्यम से सभी प्रशिक्षण संस्थानों को एक डिजिटल मंच पर लाने की योजना है। इससे संस्थान आपसी संवाद बढ़ा सकेंगे और प्रशिक्षण से जुड़े अनुभवों, पाठ्यक्रमों तथा विशेषज्ञता का आदान-प्रदान कर सकेंगे।
अध्यक्ष ने बताया कि कई संस्थानों के पास सीमित अवसंरचना, विशेषज्ञ संकाय या विशिष्ट विषयों में अनुभव की कमी हो सकती है। लेकिन जब ये संस्थान एक नेटवर्क के रूप में कार्य करेंगे, तब उनकी सामूहिक क्षमता कहीं अधिक प्रभावी साबित होगी। यही मॉडल भविष्य में प्रशिक्षण व्यवस्था को अधिक सशक्त बना सकता है।
संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर
नई पहल के तहत संस्थानों को सम्मेलन कक्ष, स्टूडियो, डिजिटल सुविधाएं और विषय विशेषज्ञों जैसी सेवाएं साझा करने का अवसर मिलेगा। इससे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता बढ़ेगी और सीमित संसाधनों वाले संस्थानों को भी बेहतर सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।
चौहान ने कहा कि जून के अंत तक सभी 700 से अधिक संस्थानों को यूएनएनएटीआई पोर्टल से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इससे प्रशिक्षण व्यवस्था को एकीकृत स्वरूप मिलेगा और विभिन्न स्तरों पर समन्वय मजबूत होगा।
राज्यों में प्रशिक्षण पहुंच बढ़ाने की जरूरत
प्रशिक्षण व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए चौहान ने कहा कि कई राज्यों में एक वर्ष के दौरान बहुत कम संख्या में लोक सेवकों को औपचारिक प्रशिक्षण मिल पाता है। कुछ मामलों में यह अनुपात केवल तीन प्रतिशत तक सीमित रहता है।
उनके अनुसार, बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी हैं जो पूरे सेवाकाल में किसी संस्थागत प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बन पाते। इसका असर कार्यकुशलता और प्रशासनिक क्षमता पर भी पड़ सकता है। इसी कारण आयोग प्रशिक्षण तक पहुंच का दायरा बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रहा है।
डेटा आधारित सुधार की होगी व्यवस्था
यूएनएनएटीआई पोर्टल के जरिए प्रशिक्षण संस्थानों को डेटा आधारित विश्लेषण और सुझाव उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे संस्थान अपनी कार्यप्रणाली की समीक्षा कर सकेंगे और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर पाएंगे।
आयोग का मानना है कि इस तरह की प्रणाली प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मंत्रालयों और विभागों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में मदद करेगी। साथ ही प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को भी बढ़ावा मिलेगा।
210 से अधिक संस्थानों को मिली मान्यता
देशभर के प्रशिक्षण संस्थानों के मूल्यांकन के लिए राष्ट्रीय सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थान मानक (एनएससीएसटीआई) ढांचा विकसित किया गया है। इस व्यवस्था के तहत अब तक 210 से अधिक संस्थानों को मान्यता प्रदान की जा चुकी है।
चौहान ने स्पष्ट किया कि केवल मान्यता देना ही उद्देश्य नहीं है। प्राथमिक लक्ष्य संस्थागत क्षमता को मजबूत करना, प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार लाना और पूरे प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोग को बढ़ावा देना है। इसी सोच के साथ एनएससीएसटीआई ढांचे को आगे बढ़ाते हुए यूएनएनएटीआई पहल को विकसित किया गया है।