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Budget Debate – केरल में बजट को लेकर एलडीएफ और कांग्रेस आमने-सामने…

Budget Debate – केरल की वित्तीय स्थिति और हालिया बजट को लेकर राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) की बजट संबंधी टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व सरकार के आर्थिक प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि एलडीएफ सरकारों की नीतियों का परिणाम राज्य पर बढ़ते कर्ज के रूप में सामने आया।

थरूर ने कर्ज के आंकड़ों पर उठाए सवाल

शशि थरूर ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के उस बयान का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि एलडीएफ सरकारों ने कल्याणकारी योजनाओं, सामाजिक न्याय और सार्वजनिक निवेश को आर्थिक विकास के साथ संतुलित तरीके से आगे बढ़ाया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर ने कहा कि इन नीतियों के बावजूद राज्य पर लगभग 5.07 लाख करोड़ रुपये का कर्ज दर्ज हुआ। उनका आरोप है कि सरकार को कर्मचारियों के वेतन और ओणम बोनस जैसी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए भी उधार का सहारा लेना पड़ा।

दस वर्षों के शासन पर कांग्रेस का हमला

कांग्रेस नेता ने एलडीएफ के दस वर्षीय कार्यकाल की आलोचना करते हुए कहा कि इस दौरान राज्य ने बढ़ते कर्ज, प्रशासनिक चुनौतियों और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों का सामना किया। थरूर ने तंज भरे अंदाज में कहा कि जब वामपंथी दल अपने शासनकाल के रिकॉर्ड के बाद मौजूदा बजट पर सवाल उठाते हैं, तो यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि इस पर प्रतिक्रिया हंसी की हो या चिंता की।

यह बयान ऐसे समय आया है जब एलडीएफ नेतृत्व ने यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) सरकार के बजट की आलोचना की है और उसकी प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं।

विजयन ने बजट आवंटन पर जताई आपत्ति

पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने हाल ही में राज्य सरकार के बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि वित्तीय संकट के दावों और बजट में किए गए प्रावधानों के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। उनका कहना था कि यदि राज्य वास्तव में गंभीर आर्थिक दबाव में होता, तो विभिन्न क्षेत्रों के लिए इस तरह के आवंटन संभव नहीं होते।

पूर्व सरकार के वित्तीय प्रबंधन का बचाव

विजयन ने यह भी दावा किया कि एलडीएफ सरकार ने अपने कार्यकाल के अंत में राज्य के खजाने में पर्याप्त संसाधन छोड़े थे। उनके अनुसार, उन संसाधनों का उपयोग सामाजिक कल्याण योजनाओं और विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए किया जा सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए मौजूदा बजट में अपेक्षित स्तर का आवंटन नहीं किया गया है, जिससे विकास संबंधी योजनाओं पर असर पड़ सकता है।

राज्य की वित्तीय स्थिति और बजट प्रबंधन को लेकर दोनों पक्षों के बीच जारी यह बहस आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रही है। आर्थिक आंकड़ों और बजटीय प्राथमिकताओं को लेकर राजनीतिक दल अपने-अपने दावे पेश कर रहे हैं, जबकि जनता की नजर इस बात पर है कि राज्य के विकास और वित्तीय स्थिरता के लिए कौन-सा दृष्टिकोण अधिक प्रभावी साबित होता है।

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