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BorderSecurity – बांग्लादेश सीमा पर केंद्र तैयार कर रहा है नई सुरक्षा रणनीति

BorderSecurity – पूर्वी भारत में बदलते राजनीतिक हालात के बीच केंद्र सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा को लेकर व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियां पश्चिम बंगाल तथा असम में सीमा प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए नई रणनीति पर काम कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज नेटवर्क और सीमापार कट्टरपंथी गतिविधियों पर सख्ती बढ़ाने के लिए संयुक्त सुरक्षा ब्लूप्रिंट तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि सीमावर्ती इलाकों में बेहतर समन्वय के जरिए सुरक्षा व्यवस्था को पहले से अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

सीमा पर बाड़बंदी तेज करने की तैयारी

पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में अपनी पहली कैबिनेट बैठक में सीमा क्षेत्र में बाड़बंदी के लिए जमीन उपलब्ध कराने का फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया अगले 45 दिनों के भीतर पूरी की जाएगी। इसके बाद बंगाल से लगी लगभग 450 किलोमीटर लंबी खुली सीमा पर फेंसिंग का काम शुरू होगा। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार यह इलाका लंबे समय से संवेदनशील माना जाता रहा है। सीमा सुरक्षा बल की नई चौकियों और बटालियन मुख्यालयों के निर्माण की भी योजना तैयार की गई है, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी मजबूत की जा सके।

हर 30 किलोमीटर पर बनेगा सुरक्षा ढांचा

नई योजना के तहत करीब हर 30 किलोमीटर पर बीएसएफ का एक बटालियन मुख्यालय स्थापित किया जाएगा। प्रत्येक मुख्यालय में लगभग एक हजार जवानों की तैनाती की संभावना जताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक 450 किलोमीटर लंबे सीमा क्षेत्र में 15 बटालियन मुख्यालय बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा सेक्टर स्तर के नियंत्रण केंद्र भी तैयार किए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि इससे सीमाई गतिविधियों पर त्वरित निगरानी और जवाबी कार्रवाई आसान होगी।

पहले भी उठते रहे हैं सीमा सुरक्षा के मुद्दे

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान आरोप लगाया था कि सीमा पर बाड़बंदी के लिए राज्य सरकार को कई बार याद दिलाया गया, लेकिन जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले 11 वर्षों में बांग्लादेश सीमा से जुड़े क्षेत्रों में 21 हजार से अधिक घुसपैठियों को पकड़ा गया है। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से सीमा क्षेत्रों में फेंसिंग और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की मांग करती रही हैं।

संवेदनशील जिलों पर विशेष नजर

सुरक्षा एजेंसियों ने पश्चिम बंगाल और असम के कुछ जिलों को विशेष निगरानी सूची में रखा है। पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर 24 परगना, कूचबिहार और उत्तर दिनाजपुर को संवेदनशील माना गया है। वहीं असम के धुबरी, करीमगंज, दक्षिण सालमारा और बरपेटा जिलों पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। इन इलाकों में संयुक्त इंटेलिजेंस ग्रिड, ड्रोन निगरानी और विशेष टास्क फोर्स तैनात करने की योजना पर काम चल रहा है।

आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर

नई सुरक्षा रणनीति में स्मार्ट फेंसिंग और नदी क्षेत्रों में फ्लोटिंग पेट्रोलिंग जैसी व्यवस्थाओं को भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही हवाला नेटवर्क, फर्जी पहचान पत्र गिरोह और डिजिटल माध्यमों से सक्रिय संदिग्ध मॉड्यूल पर नजर रखने की तैयारी की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से सीमा पार गतिविधियों को बेहतर तरीके से रोका जा सकेगा।

अतिरिक्त जवानों की भर्ती पर भी विचार

सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नई बटालियनों के गठन और अतिरिक्त जवानों की भर्ती की संभावना भी जताई जा रही है। पूर्व अधिकारियों के अनुसार यदि नई बटालियन बनाई जाती हैं, तो इससे बीएसएफ में पदोन्नति और तैनाती व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। फिलहाल सरकार चरणबद्ध तरीके से सुरक्षा ढांचे को विस्तार देने की योजना पर काम कर रही है।

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