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Border Security – सीमावर्ती इलाकों में ऊर्जा परियोजनाओं पर लागू हुए नए सुरक्षा नियम

Border Security – सीमावर्ती इलाकों में सौर, पवन और मिश्रित ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना को लेकर केंद्र सरकार ने सुरक्षा से जुड़े नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नियमों के तहत सीमा से 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाली ऐसी परियोजनाओं के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। गृह मंत्रालय ने यह व्यवस्था राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखते हुए लागू की है। नई प्रक्रिया में परियोजना से जुड़े कर्मचारियों, विदेशी नागरिकों की मौजूदगी, निर्माण और आवासीय सुविधाओं के अलावा सुरक्षा निगरानी से जुड़े कई प्रावधान शामिल किए गए हैं।

परियोजना स्थल पर कर्मचारियों का सत्यापन जरूरी

सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रस्तावित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वहां काम करने वाले इंजीनियरों, तकनीकी कर्मचारियों और श्रमिकों की पहचान का सत्यापन आवश्यक होगा। खास तौर पर पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश से संबंधित किसी व्यक्ति के परियोजना में इंजीनियर या अन्य कर्मचारी के तौर पर काम करने की स्थिति में केंद्र सरकार की अनुमति लेनी होगी। परियोजना स्थल पर निगरानी के लिए समर्पित पुलिस चौकी स्थापित करने का भी प्रावधान किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, वहां आने वाले विदेशी नागरिकों पर निगरानी रखने के साथ परियोजना परिसर में प्रवेश करने वाले कर्मचारियों का सत्यापन भी किया जाएगा।

सीमा के पास होटल और आवास को लेकर भी नियम

गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों में परियोजनाओं के आसपास आवासीय सुविधाओं और कैफेटेरिया जैसी व्यवस्थाओं का भी उल्लेख है। सीमा क्षेत्र के नजदीक ऐसी सुविधाओं को अनुमति नहीं दी जाएगी, जिनसे बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की आशंका हो और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती हो। कर्मचारियों के रहने के लिए होटल या अन्य आवासीय सुविधा सीमा से कम से कम पांच किलोमीटर दूर रखने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, परियोजना परिसर के भीतर कर्मचारियों के लिए कैफेटेरिया की अनुमति दी जा सकती है।

एलओसी और एलएसी के पास निर्माण की ऊंचाई तय

नियंत्रण रेखा और वास्तविक नियंत्रण रेखा के आसपास होने वाले निर्माण को लेकर भी स्पष्ट सीमाएं निर्धारित की गई हैं। सीमा से आठ किलोमीटर तक की दूरी में निर्माण की अधिकतम ऊंचाई तीन मीटर रखी गई है। आठ से 20 किलोमीटर के बीच यह सीमा पांच मीटर और 20 से 50 किलोमीटर के क्षेत्र में 15 मीटर तक होगी। हालांकि, पवन चक्कियों पर ये ऊंचाई संबंधी प्रतिबंध लागू नहीं होंगे।

आवेदन की प्रक्रिया भी तय की गई

सौर, पवन और मिश्रित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आवेदन सीधे गृह मंत्रालय या रक्षा मंत्रालय में नहीं किया जाएगा। प्रस्ताव पहले नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के माध्यम से आगे बढ़ेगा और उसके बाद सुरक्षा मंजूरी के लिए गृह मंत्रालय के पास भेजा जाएगा। गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद रक्षा मंत्रालय से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना होगा। दिशा-निर्देशों के अनुसार, ऐसे मामलों का निपटारा गृह मंत्रालय द्वारा 60 दिनों के भीतर किए जाने का प्रावधान है।

सीमा से एक किलोमीटर तक पूरी तरह प्रतिबंधित क्षेत्र

नए नियमों में सीमा से एक किलोमीटर का क्षेत्र पूरी तरह प्रतिबंधित रखा गया है। इस दायरे में किसी भी तरह की गतिविधि या नई परियोजना की अनुमति नहीं होगी। एक से 50 किलोमीटर के बीच परियोजनाओं के लिए सुरक्षा मंजूरी और एक से 20 किलोमीटर के बीच अनापत्ति प्रमाण पत्र से जुड़े निर्णय गृह और रक्षा मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में रहेंगे। इन प्रावधानों का उद्देश्य सीमावर्ती इलाकों में विकास कार्यों के साथ सुरक्षा संबंधी जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखना है।

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